पूर्णिया, नंदकिशोर: बिहार के सीमांचल क्षेत्र, विशेषकर पूर्णिया, को लेकर अब सरकार की योजनाएं कागज़ से निकलकर ज़मीनी हकीकत का रूप लेने लगी हैं। महुआ खबर के वरिष्ठ संवाददाता नंदकिशोर सिंह से खास बातचीत में बिहार सरकार की खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लेशी सिंह ने पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं और योजनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीमांचल को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि ठोस काम कर रही है — और जल्द ही इसके परिणाम साफ़ दिखाई देंगे। सबसे पहले उन्होंने पटना से पूर्णिया ग्रीन एक्सप्रेस वे परियोजना का जिक्र किया। मंत्री ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे सीमांचल की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने वाला है। “जब पटना से पूर्णिया की दूरी घटेगी, तो वहां के लोगों को रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में वह सब मिलेगा जो अब तक सिर्फ राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित था,” उन्होंने कहा।
इसके बाद उन्होंने पूर्णिया में एयरपोर्ट की संभावनाओं पर बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे लेकर गंभीर प्रयास कर रही है और केंद्र सरकार से भी सहयोग की उम्मीद की जा रही है। लेशी सिंह ने भरोसा जताया कि आने वाले कुछ वर्षों में सीमांचल को हवाई सेवा का तोहफा ज़रूर मिलेगा, जिससे पर्यटन, निवेश और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। रेल सेवा के क्षेत्र में भी बड़ी घोषणाएं सामने आईं। मंत्री ने पूर्णिया-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन और जनहित एक्सप्रेस के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इससे पूर्णिया के साथ-साथ कटिहार, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, फारबिसगंज जैसे कुल 10 जिलों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
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मंत्री लेशी सिंह ने कहा,
“पूर्णिया और सीमांचल के लोग अब अपने क्षेत्र को विकास की नई रोशनी में देखेंगे। चाहे सड़क हो, रेल हो या हवाई सेवा – हर स्तर पर काम हो रहा है। सरकार संकल्पित है कि सीमांचल की आवाज़ अब सीधे राजधानी पटना और देश-दुनिया तक पहुँचे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सीमांचल के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य है। साथ ही, उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों के लिए योजनाएं तैयार हैं, ताकि कोई भी इलाका विकास की रफ्तार से अछूता न रहे। इस पूरे इंटरव्यू को देखकर यह साफ़ होता है कि सीमांचल अब सिर्फ बिहार के नक्शे का पिछड़ा इलाका नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की प्रगति का एक मज़बूत स्तंभ बनेगा।
संवाददाता नंदकिशोर सिंह के मार्गदर्शन में तैयार इस विशेष रिपोर्ट में एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है — कि बिहार सरकार अब सीमांचल को लेकर सिर्फ घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि संवेदनशील और व्यावहारिक रणनीति के साथ काम में जुटी है।



