अररिया, प्रिंस कुमार: Araria News बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत चलाए जा रहे 100 दिवसीय जागरूकता अभियान के अंतर्गत आज नोबेल एकेडमी, फारबिसगंज में एक महत्वपूर्ण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला प्रोग्राम पदाधिकारी –सह– नोडल पदाधिकारी (मिशन शक्ति) अररिया द्वारा की गई। यह आयोजन महिला एवं बाल विकास मंत्री माननीय श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के मार्गदर्शन और विभागीय निर्देशों के अनुरूप संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और समुदाय प्रतिनिधियों को बाल विवाह के सामाजिक, शारीरिक एवं कानूनी दुष्प्रभावों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
वक्ताओं ने बाल विवाह अधिनियम रोकथाम, 2006 के प्रमुख प्रावधानों, बाल संरक्षण तंत्र की भूमिका, और महिला हेल्पलाइन 181 के उपयोग पर विशेष वक्तव्य दिया। संवाद में यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह न केवल एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक विकास और भविष्य की प्रगति पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने प्रतिभागियों को जागरूक करते हुए बताया कि इस कुप्रथा के पूर्ण उन्मूलन की कुंजी सक्रिय सामुदायिक भागीदारी और समय पर सूचना साझा करने में निहित है। सत्र में किशोरियों की शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता एवं जीवन-कौशल विकास के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने समुदायों में बाल विवाह रोकथाम हेतु जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने और बाल संरक्षण से संबंधित किसी भी सूचना को तत्परता से विभागीय तंत्र के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक (DHEW), बाल विकास परियोजना पदाधिकारी फॉरबिसगंज, नोबेल एकेडमी के शिक्षक-शिक्षिकाएँ, महिला पर्यवेक्षिका एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (AWW), जागरण कल्याण भारती के अध्यक्ष आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ किया गया कि अररिया जिले को ‘बाल विवाह मुक्त’ बनाने हेतु विभागीय तंत्र, विद्यालयों एवं समुदाय का परस्पर सहयोग और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा, तथा आगामी दिनों में जागरूकता गतिविधियों को और व्यापक स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा।



