पूर्णिया: पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से मुलाकात कर कोसी-सप्तकोशी उच्च बाँध (हाई डैम) परियोजना और सीमांचल क्षेत्र की गंभीर बाढ़ समस्या पर विस्तृत चर्चा की। सांसद ने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि नेपाल की सप्तकोशी और भारत की कोसी नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है, जो बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई विस्तार, 3000 मेगावाट से अधिक जलविद्युत उत्पादन और क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित कर सकती है। उन्होंने जोर दिया कि हाई डैम बनने से कोसी के अनियंत्रित प्रवाह पर स्थायी नियंत्रण होगा, जिससे बिहार के उत्तरवर्ती जिलों (पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज) में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से स्थायी राहत मिलेगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
पप्पू यादव ने सीमांचल को देश के सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में शामिल बताते हुए कोसी के अलावा महानंदा, कनकई, परगान, सौरा जैसी नदियों से होने वाले तटबंध टूटने, गांव-खेत- सड़कों के डूबने और जल-जनित रोगों की समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने मंत्रालय से सीमांचल को “विशेष बाढ़ एवं नदी कटाव प्रबंधन क्षेत्र” घोषित कर बहु-वर्षीय “सीमांचल नदी प्रबंधन एवं जल सुरक्षा मास्टर प्लान” तैयार करने की मांग की। साथ ही महानंदा फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम के शेष चरणों को शीघ्र स्वीकृति, “जल शक्ति अभियान: कैच द रेन” के तहत पूर्णिया-कटिहार में विशेष जल संरक्षण परियोजनाएं, तालाबों की जीओ-टैगिंग, डी-सिल्टिंग, वर्षा जल संचयन, भू-जल रिचार्ज और “जल सुरक्षित ग्राम मॉडल” लागू करने का आग्रह किया।
सांसद ने कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक परियोजना (₹6,282 करोड़) की धीमी प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए और रिथविक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ स्वतंत्र जांच, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तथा कार्य सक्षम एजेंसी को सौंपने की मांग की। उन्होंने प्रभावित किसानों को समयबद्ध राहत-मुआवजा और साप्ताहिक निगरानी की भी मांग की। इसके अलावा कटिहार जिले के कुर्सेला, बरारी और मानिहारी में गंगा नदी के तीव्र कटाव को अत्यंत संवेदनशील घोषित कर स्थायी तट-संरक्षण और पुनर्वास योजना बनाने का अनुरोध किया। सांसद ने विश्वास जताया कि जल शक्ति मंत्रालय त्वरित हस्तक्षेप से सीमांचल को बाढ़ और कटाव से स्थायी सुरक्षा प्रदान करेगा।



