नेपाल में राजनीतिक संकट गहराया: जेन जी समूह ने पूर्व PM ओली और गृह मंत्री की गिरफ्तारी का दबाव बनाया

अररिया, प्रिंस(अन्ना राय): नेपाल में तख्तापलट के बाद भी राजनीतिक उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। देश में अब जेन जी (Gen Z) आंदोलन का एक बड़ा समूह तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृह मंत्री रमेश लेखक** की गिरफ्तारी के लिए सरकार पर तीव्र दबाव बना रहा है।

जेन जी आंदोलन के बड़े चेहरे सूदन गुरुंग के नेतृत्व में यह समूह, आंदोलन के दौरान हुई दमनात्मक कार्रवाई और गोलीबारी में आंदोलनकारियों की मौत को लेकर इन पूर्व नेताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।

देर रात तक चली सुरक्षा प्रमुखों की आपात बैठक

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, प्रधानमंत्री निवास बालुवाटार में मंगलवार सुबह तक एक आपात बैठक चली। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और गृह मंत्री ओमप्रकाश अर्याल ने देर रात प्रधान सेनापति अशोक राज सिग्देल सहित गृह सचिव रामेश्वर दंगाल और नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल तथा गुप्तचर विभाग के प्रमुखों के साथ उत्पन्न स्थिति पर गहन विमर्श किया।

बैठक का मुख्य केंद्र यह था कि कानूनी तौर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की गिरफ्तारी की जा सकती है या नहीं। इस लंबी चर्चा के बावजूद, रात भर चली इस बैठक में कोई ठोस निचोड़ नहीं निकल सका। संभावित खतरे को देखते हुए, काठमांडू के सभी पुलिस पोस्ट से पुलिस बलों को मुख्यालय अलर्ट पर बुलाया गया है।

जेन जी के भीतर मतभेद और अल्टीमेटम

जहां सूदन गुरुंग का समूह दमन के लिए तत्कालीन सरकारी प्रमुखों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग पर अडिग है, वहीं जेन जी के दूसरे समूह में मतभेद सामने आ रहे हैं। इस दूसरे गुट का मानना है कि जीवन पटरी पर लाने के लिए स्थिरता ज़रूरी है, इसलिए जल्दबाजी में ऐसा कोई बड़ा निर्णय टाल दिया जाना चाहिए।

मांगों का पुलिंदा: शनिवार को बालुवाटार में हुई जेन जी की बैठक में, घायल आंदोलनकारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे अभिषेक श्रेष्ठ ने मांगपत्र सौंपा। इसमें केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार द्वारा की गई नियुक्तियों को रद्द करने और विजिलेंस विभाग के वर्तमान प्रमुख को हटाने जैसी मांगें शामिल हैं।
गिरफ्तारी का अल्टीमेटम: सूदन गुरुंग के समूह ने सरकार को सात दिन के भीतर तत्कालीन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री सहित अन्य की गिरफ्तारी नहीं होने पर धरने पर बैठने का अल्टीमेटम दिया है।

जांच आयोग पर ओवरलैप का खतरा

सुरक्षा निकाय प्रमुखों ने सुझाव दिया है कि पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित जांच आयोग पहले से ही बल प्रयोग के मामलों की जांच कर रहा है। ऐसे में, यदि जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही सरकार गिरफ्तारी का निर्णय लेती है, तो आयोग का कार्य ओवरलैप होने का संदेश जाएगा।

इसके अलावा, बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि राजनीतिक दल इस कार्रवाई के प्रतिवाद में आ सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने संसाधनों की कमी का भी मुद्दा उठाया, जिसमें नेपाल पुलिस के पास वाहन, वर्दी, लूटे गए हथियार और गोलियों की कमी शामिल है, जिससे बड़े नुकसान को रोकने में असफलता मिल सकती है।

फिलहाल, नेपाल के सोशल मीडिया पर जेन जी द्वारा गिरफ्तारी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे राजनीतिक माहौल अत्यधिक गर्म बना हुआ है।

 

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