पूर्णिया: Purnia News बिहार के पूर्णिया जिले स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में प्रस्तावित “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मखाना” की स्थापना को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है, क्योंकि इसे अन्यत्र स्थानांतरित करने के प्रयासों की सूचना से सीमांत और पिछड़े क्षेत्रों के किसान, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधार्थी गहराई से आहत हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा 18 अक्टूबर 2023 को पटना में बिहार के चौथे कृषि रोडमैप 2023–28 के शुभारंभ के दौरान इस केंद्र की स्थापना की घोषणा की गई थी, जिसका उद्देश्य मखाना उत्पादन, अनुसंधान और विपणन को नया आयाम देना था। योजना के तहत पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय को मखाना अनुसंधान का विशेष केंद्र बनाया जाना था, लेकिन अब इसे पूर्णिया से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की संभावनाओं ने क्षेत्रीय असंतोष को जन्म दे दिया है।
ज्ञात हो कि यह कृषि महाविद्यालय मखाना अनुसंधान के क्षेत्र में वर्षों से अग्रणी भूमिका निभा रहा है और फिलहाल यह बिहार का एकमात्र राज्यस्तरीय नोडल संस्थान है, जिसने मखाना को जीआई टैग दिलाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई है। महाविद्यालय में मखाना आधारित अनुसंधान के लिए प्रशिक्षित वैज्ञानिकों की एक अनुभवी टीम कार्यरत है, जिसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। महाविद्यालय के पास 210 एकड़ भूमि है, जिसमें से केवल 30 एकड़ पर ही वर्तमान भवन और ढांचा मौजूद है, जिससे “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना के लिए स्थान की कोई कमी नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मखाना उत्पादन का 70% से अधिक हिस्सा पूर्णिया प्रमंडल—जिसमें पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार और आस-पास के मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, खगड़िया जिले शामिल हैं—से आता है। यह क्षेत्र भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय से 80 से 90 किलोमीटर की परिधि में स्थित है, जिससे यह स्वाभाविक रूप से केंद्र की स्थापना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान बनता है। इस केंद्र की स्थापना यदि अन्यत्र की जाती है, तो यह न केवल क्षेत्र के किसानों, शोधार्थियों और उद्यमियों के साथ अन्याय होगा, बल्कि वर्षों की मेहनत, उपलब्ध संसाधनों और शोध की दिशा को भी गहरी क्षति पहुंचेगी।
स्थानीय सामाजिक संगठनों, विशेषकर पूर्णिया सिविल सोसाइटी के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार झा ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर यह मांग की है कि “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मखाना” की स्थापना की प्रक्रिया पूर्णिया में ही पूरी की जाए और संबंधित मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, जिससे सीमांत किसानों को तकनीकी और आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो सके। उनके अनुसार, यदि यह केंद्र पूर्णिया से बाहर स्थापित किया गया, तो यह पूरे सीमांचल क्षेत्र के विकास की संभावनाओं पर कुठाराघात होगा। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र और राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय किसानों, शोधार्थियों और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को सम्मान देंगे या फिर राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते एक बड़े क्षेत्र को उसके हक़ से वंचित कर दिया जाएगा।



