एक साल, कई सवाल : छात्रों द्वारा जारी पूर्णिया विश्वविद्यालय के रिपोर्ट कार्ड में खुली व्यवस्थाओं की पोल, सुधार की बड़ी उम्मीद

पूर्णिया : पूर्णिया विश्वविद्यालय के शोधार्थी रवि गुप्ता ने विश्वविद्यालय प्रशासन के एक वर्ष पूरे होने पर छात्र-छात्राओं और छात्र नेताओं की ओर से एक “रिपोर्ट कार्ड” जारी करने की बात कही है। यह रिपोर्ट कार्ड कुलपति विवेकानंद सिंह के कार्यकाल के एक साल पूरे होने और विश्वविद्यालय के आठवें स्थापना दिवस के अवसर पर सामने लाया जा रहा है।रवि गुप्ता के अनुसार, विश्वविद्यालय ने स्थापना के बाद कई संभावनाओं को छुआ है, लेकिन बीते एक वर्ष में कई ऐसे मुद्दे भी सामने आए हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। छात्र समुदाय का कहना है कि यह रिपोर्ट कार्ड किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार की मंशा से तैयार किया गया है।

शैक्षणिक गतिविधियों पर सवाल
छात्रों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष में विश्वविद्यालय स्तर पर कोई भी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित नहीं किया गया। साथ ही, स्थापित पीठ—पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ, फणीश्वर नाथ रेणु पीठ और रामधारी सिंह दिनकर पीठ—में भी न तो संगोष्ठियां हुईं और न ही जयंती या पुण्यतिथि कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पाठ्यक्रम और संसाधनों की कमी
रिपोर्ट कार्ड में यह भी कहा गया है कि सेंट्रल लाइब्रेरी में नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पुस्तकों की खरीद नहीं हुई। वहीं B.Ed (मुख्यालय), MLIS, BLIS, MCA, पर्यावरण विज्ञान, गीता अध्ययन और प्राचीन इतिहास जैसे नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी अब तक नहीं हो सकी है। कई विषयों में प्रयोगशालाओं और उपकरणों की कमी भी छात्रों ने उजागर की है।

परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक चुनौतियां
छात्रों का कहना है कि परीक्षा सत्रों में लगातार विलंब हो रहा है और घोषित परीक्षा कैलेंडर का पालन नहीं हो पा रहा। CBCS प्रणाली के तहत अब तक कई छात्रों को मार्कशीट नहीं मिल सकी है। PAT 2023 के नामांकन में लंबा आंदोलन चला, जबकि PAT 2024 और 2025 की प्रक्रियाओं में देरी और सीटों में कमी को लेकर भी नाराजगी जताई गई है।

छात्र सुविधाओं और संवाद की कमी
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि विश्वविद्यालय में अब तक दीक्षांत समारोह आयोजित कर प्रमाणपत्रों का वितरण नहीं किया गया। छात्राओं के लिए कंप्यूटर, पंखों की मरम्मत, बिजली, इनवर्टर और भवनों के रख-रखाव जैसी मूलभूत सुविधाओं में कमी बताई गई है।
इसके अलावा, छात्र संघ और सीनेटर चुनाव अब तक नहीं होने, तथा छात्रों के लिए हेल्पलाइन या सहायता केंद्र शुरू न होने को भी प्रमुख मुद्दा बताया गया है।

डिजिटल और व्यावसायिक पहल पर प्रश्न
समर्थ पोर्टल को पूरी तरह उपयोगी और यूजर-फ्रेंडली न बनाए जाने, CIA परीक्षाओं में आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता और अंगीभूत महाविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू न होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

संवाद और सुधार की अपेक्षा
रवि गुप्ता ने कहा कि यह रिपोर्ट कार्ड विश्वविद्यालय प्रशासन तक छात्रों की समस्याओं को रचनात्मक तरीके से पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगा और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। छात्रों और शिक्षकों का मानना है कि यदि प्रशासन और छात्र समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित हो, तो कई समस्याओं का समाधान सहज रूप से संभव है।

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