PURNIA NEWS,अभय कुमार सिंह : टीकापट्टी में एक-से-एक महान विभूतियों ने जन्म लिया तथा मानव कल्याण के लिए अनेक साकारात्मक कार्य भी किये । इन्हीं में से एक ऐसे चिकित्सक थे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी रोगियों की नब्ज पकड़कर तथा मात्र एक टेबलेट लिखकर रोग को छुडा देते थे । उनके निधन की खबर सुनकर विधायक शंकर सिंह सहित सैकडो की संख्या में क्षेत्र के लोग उनके अंतिम दर्शन को पहुंच गए तथा उनके पार्थिव शरीर पर फूलमाला चढाकर सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की । इस संबंध में ग्रामीण चंद्रभूषण मंडल बताते हैं कि सरकारी चिकित्सकों को लोगों ने शायद ही देखा होगा कि वे नब्ज टटोलकर बस एक टेबलेट लिख देते होंगे तथा उसी से रोगी ठीक हो जाते होंगे, परंतु उनके गांव के डाॅ गजाधर मंडल, उम्र 85 वर्ष, जिन्होंने बिहार एवं झारखंड के सरकारी अस्पतालों में नौकरी की, परंतु उन्होंने बस नब्ज देखकर, सिर्फ एक टेबलेट लिखते थे तथा रोगी ठीक हो जाते थे । इससे खासकर वैसे गरीब, वंचित रोगी, जिन्हें मंहगी दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे, वे उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं थे ।
गरीब लोग उन्हें माई-बाप शब्द से ही पुकारते थे । उन्होंने जिले के विभिन्न क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों सहित झारखंड के शिकारीपाडा, अमरापाडा स्थित अस्पतालों में अपनी सेवाएं दीं तथा वे गरीबों के मसीहा से मशहूर रहे । लगभग 50 साल पहले रेफरल अस्पताल रूपौली, अपने गांव के एपीएचसी टीकापटी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलालगढ, कटिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फलका सहित अनेक सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रहे, सभी जगह वे बस नब्ज टटोलकर रोग पकड लेते थे तथा बस एक टेबलेट लिखकर रोगी को दे देते थे, उतने में ही रोगी ठीक हो जाते थे । गांव भी आते थे, तब वे कभी भी किसी से फीस नहीं लेते थे, कुछ इसी कारण उन्होंने काफी लोकप्रियता एवं आत्मीयता पायी थी । वे झारखंड से ही सेवानितृत हुए थे । उनके निधन पर विधायक शंकर सिंह ने उनके निधन पर तथा उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि अब ऐसे लोग कहां मिलते हैं, धीरे-धीरे ऐसे अभिभावकों का साया सभी के सिर से उठते चला जा रहा है, भगवान उनकी आत्मा को शांति दें । इस अवसर पर उनके अंतिम दर्शन को लेकर सैकडो की संख्या में शुभचिंतक मौजूद थे ।



