PURNIA NEWS : 2025 में पूर्णिया शहर में दुर्गा पूजा का त्योहार खास बन चुका है, जहां श्रद्धालुओं को न केवल मां दुर्गा के भव्य रूप के दर्शन हो रहे हैं, बल्कि उन्हें पंडालों की अनोखी और आकर्षक थीम का भी आनंद मिल रहा है। इस बार के पंडालों में असम की चटाई, बंगाल के बांस और उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर की झलक देखने को मिल रही है। शहर के प्रमुख पूजा पंडालों में शानदार डिजाइन और निर्माण के लिए 12 लाख से लेकर 40 लाख रुपये तक का खर्च किया गया है। इन पंडालों में शाही लाइटिंग, विशाल प्रतिमाएं और विभिन्न प्रांतों की कला और संस्कृति का समावेश देखने को मिल रहा है। शहर में इस बार कोलकाता, पटना और रांची जैसे बड़े शहरों की रौनक नजर आ रही है। विशेष रूप से, असम, बंगाल और उत्तराखंड की संस्कृति और कला को पंडालों में अद्भुत रूप से प्रस्तुत किया गया है, जिससे स्थानीय श्रद्धालु और पर्यटक दोनों ही मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। शहर के सबसे महंगे और आकर्षक पंडालों में से एक है “फ्रेंडशिप क्लब दुर्गा पूजा समिति” का पंडाल, जो असम की चटाई और बंगाल के बांस से सजाया गया है। यह पंडाल 55 फीट ऊंचा और 70 फीट चौड़ा है, और इसका निर्माण कुल 25 लाख रुपये में हुआ है, जिसमें 7 लाख रुपये लाइटिंग और 3.5 लाख रुपये मां दुर्गा की प्रतिमा पर खर्च किए गए हैं। यह पंडाल शहर का सबसे महंगा और भव्य पंडाल है, जिसमें असम और बंगाल की कला का शानदार संगम देखने को मिल रहा है।
इसके अलावा, एक और प्रमुख आकर्षण है “सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, गुलाबबाग” का पंडाल, जो 25 लाख रुपये की लागत से सजाया गया है। इस पंडाल में 1000 बंगाली साड़ियों का उपयोग करते हुए 700 मीटर लंबी सजावट की गई है, जिसमें “ऑपरेशन सिंदूर” का अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। इस पंडाल की विशेषता है उसका पारंपरिक बंगाली डिजाइन और अनूठी थीम।रजनी चौक पूजा समिति” का पंडाल, जो 20 लाख रुपये के बजट में तैयार हुआ है, बंगाल के प्रसिद्ध मंदिर की शैली में सजाया गया है। यहाँ की प्रतिमा और लाइटिंग शहर के बाकी पंडालों से अलग हैं। यह पंडाल 1917 से बंगाली विधि-विधान के अनुसार पूजा कर रहा है, और इस बार यह विशेष रूप से बंगाल के मंदिरों की भव्यता को प्रदर्शित करने के लिए तैयार किया गया है। सप्तमी के दिन शाम 4:30 बजे दर्शन के लिए पट खोला जाएगा। इसी तरह, “प्रभात पाठागार, खुश्कीबाग” का पंडाल भी 15 लाख रुपये के बजट में तैयार हुआ है। यह पंडाल उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की थीम पर सजा है, जिसमें बंगाली छाप की प्रतिमा और आकर्षक लाइटिंग का विशेष ध्यान रखा गया है। इस पंडाल के साथ-साथ, श्रद्धालु केदारनाथ मंदिर की स्थापत्य शैली को महसूस कर पाएंगे, जो यहाँ के लोक कला और संस्कृति का बेहतरीन संगम है।

इस वर्ष की दुर्गा पूजा में, पूरे शहर को बंगाली संस्कृति के रंग में रंग दिया गया है, और इसका कारण है बंगाल से आए कारीगरों की मेहनत, जो पिछले एक महीने से इन पंडालों और प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हुए हैं। इन कारीगरों की कला और कौशल के कारण पूर्णिया की दुर्गा पूजा में बंगाल की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जिससे इस वर्ष का उत्सव और भी खास बन गया है। शहर की प्रमुख पूजा समितियां अपनी तैयारियों में दिन-रात लगी हुई हैं और पंडालों, प्रतिमाओं, और लाइटिंग के जरिए इस साल के दशहरे को विशेष बनाने की कोशिश कर रही हैं। श्रद्धालुओं को इस बार एक से बढ़कर एक इनोवेटिव और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध पंडाल देखने को मिलेंगे। सप्तमी पूजा के दिन विशेष आकर्षण होगा, और पूजा की रात ढाक, ढोल और मृदंग की गूंज के बीच मां दुर्गा के दर्शन करने का मौका मिलेगा।




