PURNIA NEWS,अभय कुमार सिंह : श्रीश्री 108 बाबा जय सिंह शूरमा मधुआरों के देवता माने जाते हैं । मछुआरे उनकी पूजा-अर्चना भादो मास शुक्ल पक्ष के एकादशी को बडे धूमधाम से करते हंै तथा उन्हीं के उपक्ष्य में मछुआरों द्वारा नाव-दौड प्रतियोगिता एवं उनके नाम पर मेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है । मछुआरा बहुल क्षेत्र डुमरी में उनका भव्य मंदिर भी बना हुआ है, जहां उनकी पूजा-अर्चना होती रहती है । इस संबंध में गांव के सामाजिक कार्यकत्र्ता संजय समदर्शी बताते हैं कि उनलोगों के द्वारा बाबा जय सिंह शूरमा उनके ही वंषज थे । किदवंतियों के अनुसार असुरों द्वारा माता कौशकी जो बाबा जय सिंह शूरमा की बहन थीं, उनपर बुरी नजर रखी जा रही थी ।
बाबा जय सिंह शूरमा नेपाल के मोरंग के पास से अपनी बहन की रक्षा के लिए असुरों से युद्ध करना शुरू किया तथा कुरसेला आते-आते उन्होंने असुरों का सफाया कर डाला । यहीं पर माता कौशकी, अपनी बहन मां गंगा से मिलीं तथा वह उसमें समाहित हो गईं । इधर बाबा जय सिंह शूरमा भी अपनी बहन को पूर्ण रूप से सुरक्षित देख यहीं अंतध्र्यान हो गए । तब से इस क्षेत्र में बाबा जय सिंह शूरमा की पूजा-अर्चना मछुआरों द्वारा की जाती रही है । डुमरी गांव के अगल-बगल मछुआरों के दर्जनों गांव हैं तथा कोसी के किनारे तथा मां गंगा के संगम की धारा से मिलता यह क्षेत्र हमेशा ही धार्मिक स्थली रहा है तथा आध्यात्मिक चेतना का बयार बहाता रहता है।



