पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में ‘ICT and AI in Higher Education’ विषय पर आयोजित छह दिवसीय FDP का समापन हुआ। कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने AI के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। समारोह में जिलाधिकारी अंशुल कुमार सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
पूर्णियाँ / किशन : पूर्णियाँ विश्वविद्यालय, पूर्णियाँ में उच्च शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का बुधवार को समापन हो गया। लोक भवन, पटना के निर्देशानुसार एमएमटीटीसी, बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘ICT and AI in Higher Education’ था। कार्यक्रम में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के प्रभावी, व्यावहारिक और जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी गई।समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्णियाँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्णियाँ के जिलाधिकारी अंशुल कुमार, IAS, उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, रिसोर्स पर्सन्स और शिक्षक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और डिजिटल मूल्यांकन पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के अंतिम दिन दो अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में एनआईटी पटना के कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर एम.पी. सिंह ने ‘Prompt Engineering for Educators and Researchers’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शिक्षण एवं शोध कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने के लिए उपयुक्त प्रॉम्प्ट तैयार करने की तकनीकों की जानकारी दी।दूसरे सत्र में ‘Digital Assessment and Evaluation Tools’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें डिजिटल माध्यमों से विद्यार्थियों के आकलन और मूल्यांकन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद दोपहर दो बजे से 3:30 बजे तक प्रतिभागियों की बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) पर आधारित परीक्षा आयोजित की गई। इसमें कार्यक्रम के विभिन्न अकादमिक सत्रों से संबंधित प्रश्न शामिल किए गए थे।

AI का उपयोग करते समय अकादमिक ईमानदारी जरूरी : कुलपति
समापन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, ई-रिसोर्सेज, ICT और AI ने शिक्षकों के लिए ज्ञान अर्जित करने, शिक्षण को प्रभावी बनाने और शोध कार्यों को नई दिशा देने की व्यापक संभावनाएं खोली हैं। हालांकि, इन तकनीकों का उपयोग सावधानी, विवेक और नैतिक मूल्यों के अनुरूप किया जाना चाहिए।उन्होंने शिक्षकों से AI के उपयोग के दौरान तथ्यों की सत्यता, मौलिकता और अकादमिक ईमानदारी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य शिक्षकों की क्षमता को सशक्त बनाना होना चाहिए, न कि मानवीय चिंतन और निर्णय लेने की क्षमता का स्थान लेना।
जिलाधिकारी ने डिजिटल तकनीक की उपयोगिता पर रखे विचार
विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने शिक्षा, प्रशासन और अन्य कार्यक्षेत्रों में ICT एवं AI आधारित उपकरणों की उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आधुनिक डिजिटल तकनीकों की संभावनाओं और उनके व्यावहारिक उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्हें सर्वश्रेष्ठ जिला निर्वाचन पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।कार्यक्रम के संयोजक प्रो. इस्तियाक अहमद ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, रिसोर्स पर्सन्स और शिक्षक प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उच्च शिक्षा में ICT एवं AI की बढ़ती प्रासंगिकता पर चर्चा की।इसके बाद डॉ. अभिषेक आनंद ने कार्यक्रम के समग्र आकलन और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ शिक्षण एवं शोध में उनके व्यावहारिक उपयोग की समझ विकसित करने में सहायक हैं। FDP के नोडल अधिकारी डॉ. नवनीत कुमार ने विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन, अकादमिक सत्रों, रिसोर्स पर्सन्स के योगदान, प्रतिभागियों की सहभागिता और प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी।
शिक्षक प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव
समापन समारोह में अनुभव-साझाकरण सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें डॉ. अभिषेक आनंद, डॉ. गोपाल कुमार, डॉ. जागृति राय, डॉ. सरोज मिश्रा और डॉ. माया कीर्ति ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अपने अनुभवों और सीख को साझा किया।प्रतिभागियों ने कहा कि कार्यक्रम से उन्हें शिक्षण एवं शोध में ICT और AI आधारित उपकरणों के उपयोग की नई जानकारी मिली। डॉ. जागृति राय ने AI के नैतिक उपयोग पर अपने विचार रखे, जबकि डॉ. माया कीर्ति ने AI आधारित शैक्षणिक उपकरणों की उपयोगिता तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने में उनकी भूमिका पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने विभागों और विद्यार्थियों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि आधुनिक तकनीकों का लाभ व्यापक शैक्षणिक समुदाय को मिल सके।
आयोजन समिति के पदाधिकारी सम्मानित
कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान के लिए कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने पूर्णियाँ विश्वविद्यालय के FDP सेल की आयोजन समिति के पदाधिकारियों प्रो. इस्तियाक अहमद, डॉ. नवनीत कुमार, डॉ. अभिषेक आनंद और डॉ. श्वेता कुमारी को सम्मानित किया। यह सम्मान कार्यक्रम के समन्वय, अकादमिक गतिविधियों के संचालन और आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में उनके योगदान के लिए दिया गया।समारोह के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि इस FDP की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि हिंदी सहित कला एवं मानविकी संकाय के शिक्षकों को भी ICT और AI के उपयोग से परिचित कराया गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का ज्ञान केवल विज्ञान और तकनीकी विषयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भाषा, साहित्य, सामाजिक विज्ञान और मानविकी के शिक्षण एवं शोध कार्यों में भी इन उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न विषयों के शिक्षकों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कुलसचिव ने जिलाधिकारी अंशुल कुमार, कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह, सभी रिसोर्स पर्सन्स, शिक्षक प्रतिभागियों तथा कार्यक्रम के आयोजन में योगदान देने वाले पदाधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
छह दिवसीय FDP के दौरान डिजिटल शिक्षण, जनरेटिव AI, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, डिजिटल मूल्यांकन और उच्च शिक्षा में तकनीक के समावेश जैसे विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की डिजिटल दक्षता बढ़ाना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाना और शोध कार्यों में आधुनिक तकनीकों के सार्थक उपयोग को प्रोत्साहित करना था।विश्वविद्यालय की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप उच्च शिक्षा में नवाचार, तकनीकी दक्षता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताते हुए इससे प्राप्त सीख को अपने अकादमिक कार्यों में लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।




