लुटियंस-बेकर की इमारत में संजोया जाएगा भारत का 5000 साल पुराना इतिहास
नई दिल्ली: रायसीना टीले पर बनी साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतें, जो स्वतंत्र भारत के 75 सालों से कार्यपालिका का सबसे शक्तिशाली केंद्र रहीं हैं, अब प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रालयों के नए स्थान पर शिफ्ट होने के बाद दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालय में तब्दील हो जाएंगी। ब्रिटिश वास्तुकार एडवर्ड लुटियंस और हर्बर्ट बेकर के बीच टीले की ऊंचाई और दृश्य को लेकर हुए विवाद की वजह से बनी ये इमारतें अब भारत के 5000 साल के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, पोकरण परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं के साक्षी बनकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवंत इतिहास की किताब बन जाएंगी।
साउथ ब्लॉक में पहली कैबिनेट बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी और आखिरी बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को की। इसी इमारत में वॉर रूम से चार बड़े युद्धों, कंधार अपहरण, नोटबंदी, जीएसटी और अनुच्छेद 370 हटाने जैसे बड़े फैसले लिए गए। यहाँ कई प्रधानमंत्रियों—पीवी नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी—को काम करते देखा गया। अटल जी के समय सुरक्षा कम थी, इसलिए कैमरे सीढ़ियों पर ही खड़े रहते थे और मंत्रियों से बाइट ले ली जाती थी।
एक बार रामकृष्ण हेगड़े से सवाल पूछते समय बंदर आ गया तो उन्होंने हंसते हुए कहा—“बंदर देगा जवाब!” कारगिल में जॉर्ज फर्नांडिस ने यहीं से घोषणा की कि वायुसेना तैनात हो रही है। अब ये इमारतें ‘युगे युगीन संग्रहालय’ का हिस्सा बनेंगी, जहां पाषाण युग से लेकर आधुनिक भारत तक की कहानी प्रदर्शित होगी। यह सिर्फ ब्रिटिश विरासत मिटाने का प्रयास नहीं, बल्कि विकसित भारत की नींव रखने का प्रतीक है, जहां अतीत से सीख लेकर भविष्य की दिशा तय की जाएगी।



