पूर्णिया: जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को होटल सेंटर प्वाइंट में अनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) एवं सी-मैम (समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन) कार्यक्रम की समीक्षा बैठक सह उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक में 06 से 59 माह के बच्चों में आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) अनुपूरण की स्थिति, कुपोषण की पहचान एवं प्रबंधन, सामुदायिक जागरूकता तथा विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर एनीमिया मुक्त भारत सूचकांक के अद्यतन प्रतिवेदन, डाटा प्रविष्टि की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं सत्यापन प्रक्रिया में सुधार के निर्देश दिए गए। प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं में अनीमिया के लक्षणों—जैसे अत्यधिक थकान, चक्कर, सूजन, सांस फूलना आदि—की पहचान और उपचार पर विशेष जानकारी दी गई तथा डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर से जांच की प्रक्रिया समझाई गई। गंभीर अनीमिया की स्थिति में आयरन सुक्रोज के माध्यम से उपचार और आवश्यकतानुसार उच्चतर स्वास्थ्य केंद्रों में रेफरल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों, किशोर-किशोरियों और महिलाओं के लिए साप्ताहिक व दैनिक आईएफए खुराक संबंधी दिशा-निर्देशों को भी दोहराया गया। कार्यशाला में समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के दस चरणों—वृद्धि निगरानी, भूख परीक्षण, चिकित्सीय मूल्यांकन, पोषण एवं चिकित्सीय प्रबंधन, परामर्श, नियमित फॉलोअप एवं वीएचएसएनडी स्तर पर निगरानी—पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने आंगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में रेफर करने, परिवारों को संतुलित आहार एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और गंभीर रूप से दुबले बच्चों की नियमित जांच सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में यूनिसेफ, एम्स पटना, शिक्षा विभाग, जिला स्वास्थ्य समिति, आईसीडीएस तथा विभिन्न विकास भागीदार संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित जिले के स्वास्थ्य एवं बाल विकास अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही।



