पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: Purnia News रूपौली प्रखंड में भारी बारिश और नदियों के उफान ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। दियारा क्षेत्र के गांवों में पानी तेजी से फैल रहा है, जिससे लोग मवेशियों समेत पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं। खेत-खलिहान जलमग्न हो चुके हैं और फसलें तबाही के कगार पर हैं। इस इलाके में बाढ़ का मुख्य कारण गंगा और उसकी सहायक धाराओं का मिलन है। कोसी, कारी कोसी, कदईधार और कोसी धार जैसी धाराएं बडी कोसी नदी में समाहित होती हैं, जो अंततः कुरसेला के पास गंगा में मिलती है। जब गंगा का जलस्तर सामान्य रहता है तो सब ठीक रहता है, लेकिन जैसे ही गंगा उफान पर आती है, ये सभी धाराएं रुक जाती हैं और पानी वापस गांवों की ओर लौट आता है — और यहीं से शुरू होता है बाढ़ का कहर।
भौवा प्रबल पंचायत, कोयली सिमडा पूरब और पश्चिम पंचायत, गोडियरपटी श्रीमाता, लक्ष्मीपुर छर्रापटी, विजय लालगंज और कांप पंचायत के दर्जनों गांव — जैसे मंझोडीह, सहोडा, अंझरी, कोशकीपुर, पासवानटोली, बैरिया, रिफ्यूजी टोला, दीनासिंह बासा आदि — सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांवों की गलियों में पानी भर चुका है, लोग ऊंची जगहों पर पनाह ले रहे हैं और सड़कें अब अस्थायी शिविर बनती जा रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। भौवा प्रबल पंचायत की वार्ड सदस्य गुंजन कुमारी, मुखिया पवित्री देवी और अमीन रविदास ने बताया कि अगर अगले 24 घंटे में बारिश थमी नहीं, तो सड़कें भी डूब जाएंगी और राहत पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।

हालांकि, अंचलाधिकारी शिवानी सुरभि का कहना है कि “अभी हालात बाढ़ राहत के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन हम लगातार नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है।” गौरतलब है कि हर साल 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच यह इलाका बाढ़ की चपेट में रहता है और इस बार भी वही चक्र दोहराया जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक सक्रिय होता है और लोगों को इस त्रासदी से राहत मिलती है या नहीं।



