SAHARSA NEWS : जिले के 865 एएनएम नें वेतन भत्ता में बढोतरी की मांग को लेकर किया धरना-प्रदर्शन

SAHARSA NEWS,अजय कुमार : बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के द्वारा संचालित बिहार राज्य संविदागत अरबन 865 एएनएम, संघर्ष समिति के राज्य कमिटी के निर्णयानुसार सोमवार को बिहार राज्य अन्तर्गत सभी सिविल सर्जन के समक्ष चिरलंबित मांगों की पूर्ति के लिए धरना-प्रदर्शन के माध्यम से माँग-पत्र समर्पित किया गया।ज्ञात हो कि सरकार आदर्श नियोजक होता है। समान कार्य का समान वेतन एक सुस्थापित नीति है। बिहार सरकार के द्वारा सरकारी क्षेत्रों में संविदा पर कार्यरत एएनएम को 15000/- (पन्द्रह हजार) रूपया मानदेय मिलता था। राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा नियोजित एएनएम को 12500 रूपया नियुक्ति होने के पूर्व मिला करता था। स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के द्वारा बिहार 865 संविदागत एएनएम को शहरी क्षेत्रों के लिए नियोजित किया गया।जिसको मात्र 11500 रूपया मानदेय मिलता है। फिलहाल राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा संविदा पर नियोजित एएनएम को 35 प्रतिशत मानदेय में बढ़ोतरी किया गया तथा अभी फिलहाल राज्य सरकार के द्वारा आउटसोर्सिंग में कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी देने का आदेश निर्गत हुआ है।खेद के साथ सूचित करना है कि संविदागत 865 एएनएम का मानदेय सरकारी स्तर पर नियुक्त एएनएम तथा राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा नियोजित एएनएम से कम है जिसके कारण समान कार्य के बदले समान वेतन के सिद्धांत का उलंघन हो रहा है और सरकार के आदर्श नियोजक होने पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है।

अर्चना भारती ने बताया कि मानदेय में विभिन्नता है तो दूसरी तरफ बढ़ती हुई महँगाई को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति के भाँति इनके मानदेय में 35 प्रतिशत इजाफा भी नहीं किया जा रहा है। साथ हीं साथ इनके शर्तों में शामिल 05 प्रतिशत के दर से सालाना मानदेय वृद्धि को भी लागू नहीं किया जा रहा है जो विभागीय निष्क्रियता का ज्वलंत उदाहरण है। साथ ही साथ सभी महिला कर्मियों को 02 (दो) दिन का प्राकृतिक अवकाश दिया जाता है उस अधिकार से भी इन संविदागत ए०एन०एम० को बंचित कर दिया गया है। टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने वाली अतिकुशल, कुशल, महिला संविदागत 865 एएनएम के साथ यह सौतेला व्यवहार अपने आपमें घोर आश्वर्य का विषय है। आप संवेदनशील पदाधिकारी हैं। हम आपसे अपेक्षा रखते हैं कि पत्र में उठाये गये समस्या का समाधान कर परमयश के भागी बनेंगे अन्यथा बाध्य होकर के कार्य बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जवाबदेही स्वास्थ्य प्रशासन की होगी।

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