SAHARSA NEWS, अजय कुमार : साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित चर्चित साहित्यकार डॉ. शेफालिका वर्मा ने कहा कि हमारी संस्कृति ‘सीता’ की तरह है, जो अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकती, और अगर उपेक्षा जारी रही तो लोक भाषाएँ धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएँगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाली पीढ़ियाँ अगर अपनी मातृभाषा का सम्मान करना नहीं सीखेंगी तो यह हमारी अस्मिता के लिए गंभीर खतरा होगा। वर्मा ने कहा कि मैथिली, असमिया, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मलयालम, कन्नड़ जैसी सभी भाषाएँ एक ही धारा की बहनें हैं, जो हिंदी को अलंकृत करती हैं और देश की विविधता को सजाती हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान ज़रूरी है, लेकिन अपनी मातृभाषा की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। 1974 से अब तक उन्होंने मैथिली, हिंदी और अंग्रेजी में कविता, कथा, संस्मरण, उपन्यास और शोधग्रंथों की दर्जनों कृतियाँ प्रकाशित की हैं, जबकि कई रचनाएँ अभी प्रेस में हैं। उनका मानना है कि जैसे अलग-अलग नदियाँ हिमालय से निकलकर सागर में मिलती हैं, वैसे ही सभी भाषाओं का लक्ष्य लोकमंगल और मानवता का उत्थान है।



