अररिया, प्रिंस कुमार: Bihar Election 2025 बिहार की राजनीति में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और इसके प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल क्षेत्र को अपना मुख्य राजनीतिक गढ़ बना लिया है। अररिया, पूर्णिया और किशनगंज के मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी ने अपनी गहरी पैठ बना ली है, जिससे यह इलाका अब ओवैसी के लिए एक ‘सेफ हाउस’ और उनकी राजनीति का केंद्र बन गया है।
🎯 पाँच सीटों पर फिर से कब्ज़ा: सीमांचल में AIMIM की वापसी
स्थानीय राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नज़र डालें तो, सीमांचल ने एक बार फिर ओवैसी को स्वीकार करते हुए जोकीहाट, अमौर, बायसी, बहादुरगंज और कोचाधामन जैसी सीटों पर AIMIM को सफलता दिलाई है। इन पाँच विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस पॉकेट में ओवैसी का प्रभाव सिर्फ़ क्षणिक नहीं, बल्कि स्थायी हो चुका है। AIMIM के नेताओं का कहना है कि पार्टी ने इन इलाकों में ज़मीनी स्तर पर वर्षों से काम किया है। “ओवैसी साहब ने इस इलाके में अपना कैम्प बना लिया है और खूब मेहनत की है। मुस्लिम बहुल इन क्षेत्रों में अब हमारा एक समर्पित कैडर है, जिसे स्थानीय जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है,” एक स्थानीय AIMIM कार्यकर्ता ने बताया।
महागठबंधन के लिए बड़ा झटका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमांचल में AIMIM की यह सफलता, ख़ासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस जैसे दलों के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। दरअसल, सीमांचल का मुस्लिम वोट बैंक पारंपरिक रूप से महागठबंधन की राजनीति की ‘रीढ़’ माना जाता रहा है। ओवैसी ने इसी ‘रीढ़’ से एक बड़ा वोट बैंक अपनी तरफ़ खींच लिया है। यह स्थिति न केवल इन पाँच सीटों तक सीमित है, बल्कि पूरे सीमांचल में महागठबंधन के लिए भविष्य की चुनौतियों को बढ़ाती है। अब, जबकि AIMIM ने सीमांचल में अपना मजबूत नेटवर्क और कैडर स्थापित कर लिया है, बिहार की राजनीति में इस पॉकेट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह इलाका भविष्य में ओवैसी की राष्ट्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक लॉन्चपैड का काम कर सकता है।



