पूर्णिया: सीमांचल के लाखों लोगों का सालों पुराना सपना अब पंख फैलाने को तैयार है। बिहार के उत्तर-पूर्वी कोने में बसे पूर्णिया में वह ऐतिहासिक घड़ी करीब आ गई है, जब यहां का एयरपोर्ट पहली बार देश के चार बड़े महानगरों – दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद – से सीधी हवाई उड़ानों से जुड़ जाएगा। जिस ज़मीन पर अब तक सन्नाटा पसरा था, वहां आज भारी निर्माण कार्य दिन-रात युद्धस्तर पर जारी है। रनवे से लेकर टर्मिनल बिल्डिंग, सुरक्षा दीवार से लेकर सड़कों की मरम्मत – सबकुछ 10 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य है। एयरपोर्ट का उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त या उसके बाद सितंबर में किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी एक अंतिम मोहर बाकी है – DGCA की मंजूरी। जैसे ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर संतुष्टि जताता है, वैसे ही सीमांचल की उड़ान को हरी झंडी मिल जाएगी।
पूर्णिया का चूनापुर एयरबेस जहां अब तक केवल सैन्य विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई देती थी, जल्द ही आम नागरिकों के सफर की नई शुरुआत का गवाह बनने वाला है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियां यहां से उड़ान भरने को तैयार बैठी हैं। खास बात यह है कि पूर्णिया एयरपोर्ट का दायरा पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट से भी बड़ा होगा – यहां 67.18 एकड़ ज़मीन पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस टर्मिनल बनाया जा रहा है, जिस पर करीब 46 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
रहस्य और रोमांच इस बात में भी है कि एयरपोर्ट की शुरुआत महज हवाई अड्डे के उद्घाटन भर नहीं होगी, यह सीमांचल के विकास की नई उड़ान होगी। रोजगार, व्यापार और पर्यटन की अपार संभावनाएं खुलेंगी। जब पहली फ्लाइट रनवे से उड़ान भरेगी, तब यह केवल एक जहाज नहीं होगा, बल्कि यह उस विश्वास की उड़ान होगी जो वर्षों से यहां के लोगों ने अपने दिल में संजो कर रखी थी। अब देखना ये है कि प्रधानमंत्री की हरी झंडी पहले आती है या DGCA की मुहर। लेकिन एक बात तय है – पूर्णिया अब केवल नक्शे का एक कोना नहीं रहेगा, बल्कि भारत के हवाई नक्शे में अपना मुकाम खुद बनाएगा।



