अंग इंडिया / संवाददाता / इशिता चक्रबोर्ती : राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से जारी शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने सरकार, न्यायपालिका और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों के अनुसार लगातार उपवास के कारण उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक घट चुका है और शरीर लगातार कमजोर होता जा रहा है। इसके बावजूद वांगचुक ने साफ कहा है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।सोनम वांगचुक देश के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
उनकी पहचान लद्दाख में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों और वैकल्पिक शिक्षा मॉडल के कारण बनी। हिंदी फिल्म 3 इडियट्स का चर्चित किरदार ‘फुंसुख वांगड़ू’ भी काफी हद तक उनके व्यक्तित्व से प्रेरित माना जाता है। इस बार उनका आंदोलन लद्दाख से जुड़े किसी मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के विरोध में केंद्रित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह 28 जून 2026 से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनके साथ Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके भी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है, जिससे मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का विश्वास कमजोर हो रहा है। इसी कारण वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, NEET सहित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, छात्रों के प्रति जवाबदेह परीक्षा प्रणाली विकसित करने और व्यापक परीक्षा सुधार लागू करने जैसी मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं।अनशन के 19वें दिन डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मेडिकल टीम के अनुसार, लगातार उपवास के कारण उनका वजन तेजी से कम हुआ है और अब यह लगभग 56.9 किलोग्राम रह गया है।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि लंबे समय तक भोजन ग्रहण नहीं किया गया तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सोनम वांगचुक ने कहा है कि शारीरिक कमजोरी के बावजूद उनका मनोबल पूरी तरह मजबूत है और वे छात्रों के भविष्य के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा। अदालत में दायर याचिका में उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन अत्यंत मूल्यवान है और सरकार का दायित्व है कि आंदोलनकारी के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाए। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि सरकारी डॉक्टर प्रतिदिन उनकी चिकित्सकीय जांच करें तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाए।
हालांकि, अदालत ने फिलहाल जबरन फोर्स-फीडिंग का कोई आदेश नहीं दिया है।इस आंदोलन को धीरे-धीरे देश के विभिन्न हिस्सों से समर्थन भी मिलने लगा है। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, 16 जुलाई को देशभर में एक दिन की सामूहिक भूख हड़ताल आयोजित की गई थी। वहीं, 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने पंजीकरण कराया है। जंतर-मंतर पर भी प्रतिदिन छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की उपस्थिति देखी जा रही है। अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने एक दिन का उपवास रखकर आंदोलन का समर्थन किया, जबकि संगीतकार विशाल ददलानी, अभिनेता सायाजी शिंदे तथा कंटेंट क्रिएटर भुवन बाम और आशीष चंचलानी सहित कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का समर्थन व्यक्त किया है।इधर, आंदोलन के साथ राजनीतिक विवाद भी जुड़ने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय के आंदोलन स्थल पर पहुंचने का दावा किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इससे आंदोलन की आधिकारिक मांगों में किसी बदलाव की जानकारी सामने आई है। इसी बीच मंच से लगाए गए कुछ नारों के वीडियो भी वायरल हुए, जिनको लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई। आलोचकों का आरोप है कि आंदोलन के दौरान कुछ धार्मिक और राजनीतिक नारे लगाए गए, जिससे इसका मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। वहीं, आंदोलन के समर्थकों का कहना है कि कुछ वायरल वीडियो या किसी व्यक्ति की मौजूदगी के आधार पर पूरे आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अब भी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।केंद्र सरकार की ओर से अब तक आंदोलन की प्रमुख मांगों पर कोई औपचारिक निर्णय या घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

लगातार 19 दिनों से जारी इस आमरण अनशन ने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर देशभर में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेती है या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेता है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर जारी यह संघर्ष लाखों छात्रों की उम्मीदों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग का प्रतीक बन चुका है।