पूर्णिया: छात्र नेता राजा कुमार ने पूर्णिया विश्वविद्यालय के पीएचडी 2023 नामांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय अपने “नए-नए कृतिमानों” के साथ आगे तो बढ़ रहा है, लेकिन इसकी कीमत छात्रों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जब तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के तत्कालीन समन्वयक खुद सामने आकर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि पीएचडी 2023 में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो फिर छात्रों को इतने दिनों तक परेशान करना और उनके सत्र को अनावश्यक रूप से विलंबित करना कहां तक उचित है।
राजा कुमार ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी न किसी को फंसाने या चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई दिखाने की मंशा से पूरा मामला खींचा गया,甚至 यह आशंका भी जताई कि विश्वविद्यालय के अधिकारी अपने करीबी लोगों को पीएचडी में नामांकन दिलाने के लिए यह “खेल” खेल रहे थे। उन्होंने कहा कि कुलपति द्वारा PET 2023 को “फर्जी” बताए जाने के बावजूद आज तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया कि आखिर इसमें क्या धांधली हुई थी।
छात्र नेता ने मांग की कि कुलपति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि पीएचडी नामांकन का असली विवाद क्या था, PET में नामांकन लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं के दस्तावेजों की जांच हो, नौकरी या अन्य कार्य में लगे शोधार्थियों पर अंकुश लगाया जाए और पीएचडी विभाग में बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू की जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूर्व में हर बार दूसरी सूची जारी होती रही है, तो इस बार इतना विलंब होने के बावजूद दूसरी सूची क्यों नहीं निकाली गई, जिससे लंबे समय से इंतजार कर रहे छात्रों को मौका मिल पाता।



