अररिया, प्रिंस कुमार: 31 जनवरी अररिया के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे चतुर्थ) रवि कुमार की अदालत ने शनिवार को एक दिल दहला देने वाले मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने जमीन विवाद में अपनी ही सगी मां की निर्मम तरीके से जलाकर हत्या करने वाले आरोपी पुत्र शंकर मंडल को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले की पृष्ठभूमि: सतबेर वार्ड संख्या 7 की घटना
यह मामला बरदाहा थाना क्षेत्र के सतबेर (गरही टोला) का है। 13 मई 2024 को प्राथमिक विद्यालय सतबेर से करीब 100 मीटर की दूरी पर मसोमात फेकनी देवी का अधजला शव बरामद हुआ था। मृतका के पेट और गले पर गहरे जख्म के निशान थे, जिससे यह स्पष्ट था कि हत्या बड़ी क्रूरता से की गई थी।
सजा का विवरण: आर्थिक दंड न देने पर बढ़ेगी जेल
अदालत ने दोषी शंकर मंडल (पिता- स्व. सहजन मंडल) को दो अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई: भादवि की धारा 302 (हत्या): आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना। भादवि की धारा 201 (साक्ष्य मिटाना): 5 वर्ष सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि जुर्माने की कुल राशि (60 हजार रुपये) जमा नहीं की जाती है, तो दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
क्रूरता की हद: जेल से छूटते ही रची हत्या की साजिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शंकर मंडल का अपनी मां के साथ जमीन को लेकर पुराना विवाद था। इससे पहले भी उसने अपनी मां के सिर पर प्रहार कर उन्हें लहूलुहान कर दिया था, जिसके आरोप में वह जेल गया था। घटना से महज एक माह पहले ही वह जेल से रिहा होकर बाहर आया था और आते ही उसने अपनी मां को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया।
वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान से मिला न्याय
इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस ने 30 अक्टूबर 2024 को कोर्ट में ठोस आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले में शंकर मंडल की पत्नी वीणा देवी भी आरोपी है, जिसका मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
अदालत में दलीलें
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रभा कुमारी ने मजबूती से पक्ष रखा, जबकि अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता छंगुरी मंडल और किशोर कुमार श्रीवास्तव ने दलीलें दीं। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने शंकर मंडल को इस जघन्य अपराध का दोषी पाया।



