पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: वर्तमान में गिरती सरकारी शिक्षा व्यवस्था चिंताजनक स्थिति में पहुंचती चली जा रही है। इसमें सुधार की तत्काल आवश्यकता है। उक्त बातें अवकाशप्राप्त शिक्षाविद जागेष्वर प्रसाद सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक शिक्षक हैं और मेरा मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है, लेकिन आज, सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति देखकर मुझे बहुत चिंता होती है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता दिन-ब-दिन गिरती जा रही है, और इसका खामियाजा हमारे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकार ने शिक्षकों की व्यवस्था तो विद्यालयों में कर दी, परंतु संसाधन एवं शिक्षकों की कत्र्तब्यहीनता के कारण शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। स्कूलों में संसाधनों की कमी है, जैसे कि पुस्तकें, प्रयोगशालाएं और खेल के मैदान का घोर अभाव देखा जा रहा है। शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है और बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक सरकार की उदासीनता का भी शिकार हो रहे हैं, उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता है। शिक्षा नीतियों में लगातार बदलाव हो रहा है, जिससे स्कूलों में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। सरकार को शिक्षा पर अधिक धन खर्च करना चाहिए, ताकि स्कूलों को संसाधन मिल सकें।
शिक्षकों को ठीक से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और उन्हें समय पर वेतन मिलना चाहिए। शिक्षा नीतियों को स्थिर और स्पष्ट होना चाहिए, ताकि स्कूलों में अनिश्चितता न हो। मेरा मानना है कि हमें मिलकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुधारना होगा, ताकि हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। इसके लिए सरकार को शिक्षकों को पूरी तरह से स्वतंत्र कर देना चाहिए, उनसे गैर शिक्षणकार्य बंद कर देना चाहिए, ताकि वे सिर्फ बच्चों को शिक्षा दे सकें। इसमें सबसे ज्यादा गरीब बच्चे ही प्रभावित नजर आते हैं।



