पूर्णिया: लालगंज पंचायत स्थित बंगाली कॉलोनी में आयोजित श्री श्री 108 हरिनाम संकीर्तन का 72 घंटे बाद भव्य समापन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। भीष्म एकादशी के पावन अवसर पर आयोजित इस अखंड संकीर्तन में हजारों महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लेकर राम और कृष्ण नाम का जाप किया। कार्यक्रम का शुभारंभ 28 जनवरी 2026 को कलश यात्रा के साथ हुआ, जबकि 29 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक 72 घंटे का अखंड कीर्तन आयोजित किया गया। समापन दिवस 31 जनवरी को पदावली कीर्तन और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए छह क्विंटल खिचड़ी का महाप्रसाद तैयार किया गया, जिसका वितरण बड़ी संख्या में भक्तों के बीच किया गया। अंतिम दिन राधा और कृष्ण के मूर्ति स्वरूप बने बच्चों को घर-घर भ्रमण कराया गया। श्रद्धालुओं ने घरों के द्वार पर उनका पूजन किया, प्रणाम किया और दक्षिणा अर्पित की। इस दौरान युवा-युवतियों ने राधा-कृष्ण के रूप में पारंपरिक ढंग से कीचड़ और पानी से स्नान कर भक्ति गीतों पर नृत्य किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

आयोजन समिति और पदाधिकारी
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के पदाधिकारी इस प्रकार रहे— अध्यक्ष: विजय कु० दास, उपाध्यक्ष: उषा रंजन दास, सचिव: भानु घोष, कोषाध्यक्ष: प्रमोदजीत दास, पुजारी: जय चन्द्र दास इसके अलावा समिति के सदस्य के रूप में संजय दास, गोपाल दास, अनिल दास, चंदन दास, मदन घोष, रतन दास, मनोज दास एवं पवन दास सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि राम, सीता, राधा और कृष्ण की छवि केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में सादगी, शक्ति और सेवा भाव का संदेश देती है। उन्होंने इन मूल्यों को समाज कल्याण से जोड़ने का संकल्प भी व्यक्त किया।
आयोजकों के अनुसार यह संकीर्तन कार्यक्रम वर्ष 2012 से लगातार प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में दूर-दराज से रामधुनी और कीर्तन प्रस्तुत करने वाले कलाकार भी पहुंचे, जिन्होंने अपनी भक्ति प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। तीन दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान की।



