पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: पूर्णिया–कटिहार जिला सीमा पर गदीघाट स्थित महारानी कौशल्या का ऐतिहासिक मंदिर और पौष पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला प्रसिद्ध मेला आपसी स्वार्थ, पारिवारिक विवाद और प्रशासनिक उदासीनता के कारण बीते करीब 35 वर्षों से विलुप्त होता चला गया है, जहां कभी लगभग बीस एकड़ क्षेत्र में एक माह तक सोनपुर मेले की तर्ज पर भव्य आयोजन होता था और हजारों श्रद्धालु कोसी की धारा में स्नान कर माता के चरणों में जलाभिषेक करते थे; आज स्थिति यह है कि मंदिर पूरी तरह जर्जर हो चुका है, उसके चारों ओर खेती हो रही है और पूजा-पाठ बंद है, जबकि कभी यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ लकड़ी के कारोबार और मनोरंजन का भी बड़ा केंद्र था—स्थानीय लोगों का कहना है कि जमींदार परिवारों के आपसी विवाद, अतिक्रमण और कटिहार जिला प्रशासन की लापरवाही ने इस गौरवशाली परंपरा को खत्म कर दिया, हालांकि पूर्व मुखिया रामचंद्र पंडित ने पुल निर्माण के बाद मंदिर के जीर्णोद्धार और पौष पूर्णिमा मेले को फिर से शुरू कराने का भरोसा जताया है।
गदीघाट में आस्था का केंद्र रहा महारानी कौशल्या का मंदिर उपेक्षा की भेंट चढ़ा

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