अंग इंडिया संवाददाता/पूर्णिया/
बसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर पूर्णिया से महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक और अनुकरणीय मिसाल सामने आई है। कला, श्रद्धा और आत्मनिर्भरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हुए पूर्णिया की तीन बहनों—पूजा, आरती और पुष्पा—ने माता सरस्वती की भव्य प्रतिमा का निर्माण कर न केवल शहर बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
करीब 9 फीट ऊँची माता सरस्वती की यह प्रतिमा पूजा पंडालों की शोभा तो बढ़ा ही रही है, साथ ही सोशल मीडिया पर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लोगों द्वारा इस प्रतिमा की कलात्मकता और भव्यता की जमकर सराहना की जा रही है।
बताया जाता है कि ये तीनों बहनें पिछले 12 वर्षों से सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा और विश्वकर्मा पूजा की प्रतिमाएँ स्वयं तैयार कर रही हैं। इस कार्य में उनका पूरा परिवार—माता-पिता और दो भाई—कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करता है। पारिवारिक सहयोग और निरंतर मेहनत के चलते यह कला अब इनके लिए स्थायी रोज़गार का माध्यम बन चुकी है।
बड़ी बहन पूजा ने बताया कि यह काम केवल उनका व्यक्तिगत प्रयास नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा, “हम सब मिलकर यह कार्य करते हैं। मैं इससे अलग नहीं जा सकती। मेरे पीछे-पीछे मेरी दोनों बहनें, दोनों भाई और माता-पिता पूरा सहयोग करते हैं। रोज़गार हमारे साथ है, मेहनत हमारे साथ है। अगर कोई भी काम संकल्प के साथ किया जाए, तो कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रह सकता।”
खास बात यह है कि तीनों बहनें शिक्षा और परंपरा—दोनों को समान महत्व देती हैं। वे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पारंपरिक कला को भी आगे बढ़ा रही हैं। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पूर्णिया की इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि श्रद्धा, हुनर और आत्मनिर्भरता एक साथ चलकर समाज के लिए नई प्रेरणा बन सकते हैं।



