सहरसा, अजय कुमार: राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में महान स्वतंत्रता सेनानी एवं जननायक भगवान बिरसा मुंडा के 150 वें जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस सोमवार को भव्य रूप से मनाया गया। प्राचार्य डॉ. गुलरेज रौशन रहमान, पुर्व प्राचार्य डॉ. ललित नारायण मिश्र, डॉ. अरूण कुमार झा, डॉ. इन्द्र कांत झा, डॉ. अमिष कुमार, डॉ. अक्षय कुमार चौधरी इत्यादि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वही मंचासीन अतिथियों ने उनके तैल चित्र पर पुष्प चढ़ाकर कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. गुलरेज रौशन ने कहा कि आज जनजातीय गौरव दिवस पर हम लोग जनजातीय स्मिता, सामाजिक जीवन और लोक संस्कृति के संरक्षक भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष को स्मरण करते हुए यह दिवस मना रहे हैं।
उन्होंने जंगल और प्रकृति पर आधारित जनजातियों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन पर गोरी सरकार की नीतियों और ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाये जा रहे अभियान के विरूद्ध उलगुलान का नारा दिया था जिसका प्रभाव भारत की स्वदेशी आन्दोलन पर लंबे समय तक रहा। बिरसा ने ऐलान कर दिया था कि अंग्रेजी सरकार की हुकूमत अब खत्म। अब जंगल और जमीन पर आदिवासियों का राज होगा। उन्होंने नारा दिया अबुआ दिसुम अबुआ राज अर्थात हमारे देश पर हमारा राज होगा। डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि, बिरसा मुंडा द्वारा दिया गया क्रांति का नारा “आबुआ राज सेतेरे जना, महारानी राज तुंडु जना” अर्थात रानी का शासन खत्म करो और हमारा साम्राज्य स्थापित करो, बाद के वर्षों में क्रांतिकारी राष्ट्रीय आंदोलन का लोकप्रिय नारा बना। 1942 में गांधीजी ने जो भारत छोड़ो का नारा दिया था उसका बीज वर्ष 1900 में ही बिरसा मुंडा ने आरोपन कर दिया था। डॉ. अक्षय कुमार चौधरी ने कहा कि मुंडा समाज ने बिरसा को धरतीआबा अर्थात धरती का पिता कहकर संबोधित किया था किन्तु वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन में राजवंशो के विद्रोह के 33 वर्ष बाद जिस नियोजित और संगठित विद्रोह का नेतृत्व उन्होंने किया।
वह उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीद महापुरुषों की अग्रणी पंक्ति में खड़ा कर दिया। डॉ. अमिष कुमार ने कहा कि गांधीजी की पदयात्रा, सत्याग्रह और भुख हड़ताल जैसी आन्दोलन का स्वरूप भगवान बिरसा मुंडा के आन्दोलन में भी देखा जाता है।डॉ. लक्ष्मी कर्ण ने कहा कि जेल के दस्तावेजों में बिरसा की मृत्यु हैजा से बताया गया है परंतु वास्तविकता तो यह है कि अंग्रेजी सरकार ने उनका मीठा जहर देकर हत्या किया था। एनएसएस के संयोजक डॉ. इन्द्र कांत झा जनजातिय गौरव दिवस पर केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न योजनाओं की जानकारी दिया। अवसर पर डॉ. अरूण कुमार झा, डॉ. पूजा कुमारी, डॉ. कविता, डॉ. शुभ्रा, डॉ. सुमंत राव, डॉ. आलोक कुमार झा इत्यादि ने भी संबोधित किया।



