Yamuna Pollution : दिल्ली में यमुना नदी की दुर्दशा: प्रदूषण के साथ अतिक्रमण और सरकारी नाकामी का चौंकाने वाला खुलासा

Yamuna Pollution : दिल्ली में यमुना नदी की बदहाली का कारण केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि अतिक्रमण, अनियोजित शहरीकरण, और सरकारी योजनाओं की विफलता भी प्रमुख कारक हैं, जैसा कि हाल की रिपोर्ट्स में सामने आया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना के पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) असगरपुर में 72 mg/L तक पहुंच गया, जो मानक (3 mg/L) से 24 गुना अधिक है, और डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) कई स्थानों पर शून्य है, जिससे जलीय जीवन असंभव हो गया है। नजफगढ़ नाले जैसे 42 नालों से 60% अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरा सीधे यमुना में जाता है, जिससे सफेद जहरीला झाग और बदबू की समस्या बढ़ी है। इसके अलावा, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के सर्वे ने खुलासा किया कि यमुना के 9,700 हेक्टेयर बाढ़ क्षेत्र (O-Zone) के 75% (7,362 हेक्टेयर) पर भू-माफिया ने 5-7 मंजिला इमारतें बना ली हैं, जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हुआ और बाढ़ का खतरा बढ़ा। 10 बायोडायवर्सिटी पार्कों में से 6 पर भी अवैध कब्जा है। अनियोजित शहरीकरण और 25 पुलों का निर्माण, जो वजीराबाद से ओखला के 22 किमी खंड में हर 800 मीटर पर हैं, ने नदी की हाइड्रोलॉजी को नुकसान पहुंचाया। मॉनसून में बाढ़ की अनुपस्थिति ने गाद और प्रदूषकों को जमने दिया, जिससे प्रदूषण और गहरा गया। सरकारी प्रयास, जैसे यमुना एक्शन प्लान (1993 से), जिसमें 6,856 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, और दिल्ली सरकार की 2025 तक नदी साफ करने की घोषणाएं, ज्यादातर कागजी साबित हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि नालों में छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने और अतिक्रमण हटाने जैसे कठोर कदमों के बिना यमुना का पुनर्जनन असंभव है। यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय, बल्कि दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर रही है।

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