सहरसा,अजय कुमार : कहते है परोपकाराय पुण्याय पापाया पड़पीड़नम आर्थात दूसरो की उपकार करने से पुण्य और दूसरे को पीड़ा देने से पाप होता है।वही मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। जहाँ इस बढ़ती ठंड में लोग जल्दी अपने घर चले जाते है वहीं रात के बारह बजे एक तस्वीर सामने आती है। एक युवा रात को घर से निकल कर उन लोगो को कंबल ओढ़ाते है जो सड़क किनारे इस ठंड मे सो रहे होते है। आज कई दिनों से रेलवे परिसर, बस स्टैंड, सहित कई जगहों पर उन लोगो के बीच कंबल प्रदान की जा रही है जो निसहाय है।
कंबल देते समय युवा समाजसेवी रौशन मिश्रा माधव बताते है की जो सकून ये सेवा करने से होती है उसको शब्दो में बयां नहीं की जा सकती है। ज्ञात हो की रौशन मिश्रा कई वर्षो से दिव्यांग, निसहाय की मदद करते आ रहे है। अपनी टीम रोटी बैंक और बढल हाथ की तहत लोगो की आस बने हुए है।



