Chhath 2025,विमल किशोर : लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला बिहार का सुप्रसिद्ध छठ पूजा उदयिमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न.प्रखंड क्षेत्र के सुप्रसिद्ध बेलगच्छी घाट ,पल्सा घाट,मच्छटटा घाट,बंगरा घाट ,पोठीया ,गंगेली घाट, खरहिया घाट ,गंगेली घाट, विष्णुपुर घाट , खाड़ी ,तेलंगा घाट सहित विभिन्न घाटों एवं तालाबों में उदयिमान भगवान भास्कर को अर्घ देने के साथ छठ पूजा संपन्न हुआ .प्रखंड क्षेत्रों में विभिन्न जगह छठ पूजा धूमधाम से मनाया जा गया l प्रखंड क्षेत्र के बेलगच्छी स्थित पतित पावनी परमान नदी में बने बेलगच्छी घाट परिसर में बने घाट में छठ व्रतियों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया l वहीं कई छठ व्रतियों ने अपने घरों में तालाब बनाकर भगवान भास्कर की पूजा अर्चना किया l बिहार में छठ पूजा मनाने की अलग ही मान्यता है l छठ व्रतियों ने बताया कि वह अपने पति एवं बाल बच्चों की सुख समृद्धि एवं लंबी आयु के लिए भगवान भास्कर से कामना करते है l उदयिमान भगवान भास्कर को अर्द्ध दिया और उदीयमान भगवान भास्कर को अर्द्ध देने के साथ ही चार दिवस महापर्व छठ का समापन हो गया l
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा श्रद्धालुओं साल में दो बार मनाते हैं l खासकर कार्तिक मास में वृहद पैमाने पर श्रद्धालु लोग छठ पूजा करते हैं l कार्तिक मास में मनाने वाले छठ पर्व पर चैती छठ दोनों में आस्था समान है। 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखकर व्रत बहुत ही कठिन होता है. पंडित उमानाथ झा ने बताया कि प्रकृति के साथ मिलन एवं प्रकृति को संजोए रखने का महापर्व छठ पर्व है। जिसमें सभी चीज प्रकृति स्वरूप को पूजने का प्रावधान है। हरे पेड़ पौधों से प्रकृति को पूजा की जाती है एवं मां गंगा का पूजा कर भक्त श्रद्धालु अपने परिवार के सुख समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना करते हैं।



