“एक हँसी से—बदल गई सोच: किशनगंज मंडल कारा में गूँजी लाफिंग बुद्धा की हँसी की गूँज”

किशनगंज: लाफिंग बुद्धा सामाजिक ट्रस्ट के प्रणेता नागेश्वर दास, जिन्हें देश-दुनिया में लाफिंग बुद्धा के नाम से जाना जाता है, ने आज किशनगंज मंडल कारा में कैदियों के बीच विशेष प्रेरक सत्र “हँसी जीवन सूत्र” का आयोजन किया। सत्र के दौरान उन्होंने बताया कि— “हँसी मन को प्रसन्न करती है, सोच को सकारात्मक बनाती है और इंसान को क्षमाशील बनाती है। जब मन अच्छा रहता है तो जीवन अपने-आप आसान हो जाता है।”

उन्होंने हँसी के वैज्ञानिक, मानसिक और सामाजिक लाभों को बेहद सरल भाषा में समझाया: हँसी तनाव और दबाव को तुरंत कम करती है, यह शरीर की immunity और मानसिक संतुलन को मजबूत करती है, हँसता हुआ मन निर्णय क्षमता को बढ़ाता है, हँसी क्षमा, दया, अपनापन और सकारात्मक व्यवहार को जन्म देती है, यह अवसाद, अकेलापन और नकारात्मकता को दूर करने की सबसे आसान दवा है।जैसे-जैसे नागेश्वर दास प्रेरक सूत्र साझा करते गए, कैदियों के चेहरे खिलते गए और पूरा परिसर ठहाकों से गूँज उठा। वातावरण में वह सकारात्मक ऊर्जा दिखी, जो मन को हल्का कर दे और सोच को नया रास्ता दिखा दे।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जेल अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार, जेलर प्रदीप कुमार सिंह, और पवन साह की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। अधिकारियों ने कहा कि— “ऐसे कार्यक्रम कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य सुधार, व्यवहार परिवर्तन और तनाव प्रबंधन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।” कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक हँसी योग से हुआ, जहाँ सभी कैदियों ने जोरदार ठहाका लगाया और पूरा किशनगंज मंडल कारा सकारात्मकता से गूँज उठा— “आज हँसी ने यहाँ दिलों और सोच के दरवाज़े खोल दिए।”

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