पटना: पटना जिले के बिहटा प्रखंड की सिमरी पंचायत आज सुबह एक अनोखी क्रांति का गवाह बनी, जब सैकड़ों की तादाद में किशोर-युवा “रन फॉर वीमेन” में दौड़े और हाथों में तख्तियां लेकर चिल्लाए – “फेक आईडी बंद करो, मॉर्फ्ड फोटो जलाओ, डीपफेक बनाने वाला जेल जाएगा!”। सहयोगी संस्था के 16 दिवसीय लिंग-हिंसा उन्मूलन अभियान का यह सबसे जोशीला कार्यक्रम था, जिसमें करीब 70 लड़के-लड़कियां पोस्टर, नारे और ढोल-नगाड़ों के साथ गांव की हर गली, हर चौराहे से गुजरे और लोगों को जगाया कि आज की सबसे खतरनाक हिंसा की-बोर्ड और मोबाइल स्क्रीन के पीछे छिपी है।
युवाओं ने खुलकर बोला – प्रेम कुमार ने कहा, “गांव का लड़का शहर की लड़की को ट्रोल करे या शहर वाला गांव की दीदी को गंदा मैसेज भेजे, दोनों बराबर गुनहगार हैं।” प्रिंस कुमार ने चेताया, “हम इसलिए दौड़ रहे हैं ताकि हर माँ-बहन को पता चले कि साइबर थाना 1930 पर एक फोन करने से दरिंदा 24 घंटे में पकड़ा जा सकता है।” विक्की ने जोड़ा, “अगर हम आज नहीं बोले तो कल हमारी अपनी बहन का नंबर आएगा।”
संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “आज डिजिटल हिंसा सिर्फ शहरों की नहीं, गांवों की भी हकीकत है। फेक अकाउंट से धमकी, प्राइवेट फोटो वायरल करना, डीपफेक से बदनाम करना – ये सब रोज की खबर बन चुके हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर पंचायत में 10 लड़के-लड़कियां तैयार हों जो डिजिटल चौकीदार बनें और अपनी बहनों की ऑनलाइन इज्जत की रक्षा करें।”
मोनिका, लाजवंती, प्रियंका, शारदा, धर्मेंद्र, निर्मला, बिंदु, उषा और मनोज की पूरी टीम ने रात-दिन मेहनत कर इस दौड़ को यादगार बनाया। नतीजा यह हुआ कि सिमरी पंचायत में आज पहली बार डिजिटल हिंसा पर खुला संवाद शुरू हुआ और युवाओं ने ठान लिया कि अगली बार वे पूरे प्रखंड में “साइबर रक्षक दल” बनाकर हर स्कूल-कॉलेज में जागरूकता फैलाएंगे। छोटी-सी दौड़ ने साबित कर दिया – जब गांव के लड़के-लड़कियां एक साथ खड़े हो जाएं तो डिजिटल दुनिया का सबसे बड़ा गुंडा भी घुटने टेक देगा।



