सहरसा,अजय कुमार/
ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान व फाउंडेशन सहरसा के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा जी ने बतलाया है की माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथी को सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को वसंत पंचमी के तौर पर मनाने की भी परंपरा है,ऐसा माना जाता है कि माघ शुक्ल पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा विशेष फलदायी होती है।
इस दिन माँ शारदा के पूजन का बहुत महत्व है।मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 23 जनवरी शुक्रवार को पंचमी तिथि रात्रि 12.22 मिनट तक है।वैसे,उदया तिथि के अनुसार श्रद्धालु पुरे दिन भक्ति भाव से मां सरस्वती की प्रतिमा प्रतिष्ठित कर विधि-विधान के साथ पूजन करेंगे।लेकिन सरस्वती पूजन का अति विशिष्ट मुहूर्त सुबह 09.23 मिनट से पहले है।वैसे माता वीणा वादनी सम्पूर्ण दिन पंचमी तिथि होने से होती रहेंगी।
इस दिन शिशुओं का पारंपरिक विधि से अक्षरारंभ संस्कार होगा।इसी दिन से उनका विद्या अध्ययन भी शुरू हो जाएगा। माघ शुक्ल पंचमी को मां शारदे के साथ भगवान गणेश, लक्ष्मी, नवग्रह, पुस्तक-लेखनी और वाद्य यंत्र की भी पूजा होगी। मान्यता है की माता सरस्वती,भगवान ब्रह्मा की अर्धांगिनी हैं और इसीलिए ब्रह्मा को वागीश वाक् या वाणी का स्वामी भी कहा जाता है।



