अंग इंडिया संवाददाता/पूर्णिया/
पूर्णिया एयरपोर्ट के 100 किलोमीटर त्रिज्या क्षेत्र में आने वाले बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल के हवाई यात्रियों के व्यापक हितों को देखते हुए इसे ‘कंप्लीट एयरपोर्ट’ के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता विजय श्रीवास्तव ने भारत सरकार और बिहार सरकार से इस विषय पर एक उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक अविलंब आयोजित करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से उपेक्षित और विलंबित पूर्णिया एयरपोर्ट की शुरुआत निश्चित रूप से सराहनीय और प्रशंसनीय है। दिल्ली, हैदराबाद, अहमदाबाद और कोलकाता के लिए शुरू हुई कनेक्टिविटी क्षेत्र के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। हालांकि, बैंगलोर, चेन्नई, गुवाहाटी और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ान सेवाओं की जबरदस्त मांग अब तक अधूरी और उपेक्षित बनी हुई है।
विजय श्रीवास्तव ने एयरपोर्ट से जुड़ी बुनियादी और संरचनात्मक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सिविल एंक्लेव की एनएच-31 से फोरलेन सड़क कनेक्टिविटी का अब तक कोई ठोस स्वरूप सामने नहीं आया है। वहीं एयरफोर्स स्टेशन पूर्णिया में इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) के लिए आवश्यक संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का इंस्टालेशन भी अब तक नहीं हो सका है।
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की अतिरिक्त 15 एकड़ भूमि की मांग वर्षों पुरानी है, लेकिन बिहार सरकार द्वारा अभी तक यह भूमि एएआई को हैंडओवर नहीं की गई है। इसके अलावा स्थायी टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण के लिए अब तक टेंडर जारी नहीं होना भी चिंता का विषय है।
पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिलने के बावजूद एप्रन, टैक्सीवे और ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट से जुड़े कार्यों की धीमी प्रगति को उन्होंने दुखद और आपत्तिजनक बताया। साथ ही एयरफील्ड वॉच घंटा आधारित समस्याओं, मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली, विमानन सुरक्षा तथा सुरक्षित उड़ान और लैंडिंग के लिए एयरपोर्ट परिसर में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के केंद्र की स्थापना प्रक्रिया शुरू न होने पर भी सवाल उठाए।
इसके अतिरिक्त पूर्णिया एयरपोर्ट पर एयर कार्गो सुविधा, डाकघर, बैंक एटीएम और एयरपोर्ट के आसपास पर्याप्त साइनेज की अनुपलब्धता को भी गंभीर कमी बताया गया।
विजय श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्णिया एयरपोर्ट बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों की करोड़ों आबादी के लिए एक लाइफलाइन के समान है। ऐसे में इसे पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए उपरोक्त सभी बिंदुओं पर आधारित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक पर केंद्र और राज्य सरकार को सहानुभूतिपूर्वक और अविलंब विचार करना चाहिए।



