नई दिल्ली: कंबोडिया के कंपोट प्रांत में दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा और सबसे संगठित ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी केंद्रों का जाल उजागर हुआ है, जहां 11 हजार से ज्यादा लोग—ज्यादातर मानव तस्करी के शिकार—को जबरन भारतीय, चीनी और अन्य देशों के नागरिकों को वीडियो कॉल पर फर्जी CBI, क्राइम ब्रांच और अदालतों के नाम पर डराकर करोड़ों रुपये ठगने के लिए मजबूर किया जाता था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन ठगी केंद्रों में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लगाकर सरकारी दफ्तर जैसा माहौल बनाया जाता था, ताकि पीड़ित को सब कुछ असली लगे। वियतनाम सीमा से सटे इस इलाके में 190 से ज्यादा बड़े ठगी अड्डे और कुल 200 से अधिक सेंटर चल रहे थे, जहां 173 से ज्यादा अपराधियों को पकड़ा गया है।
कंबोडिया पुलिस ने सीमित संसाधनों—करीब 1000 पुलिसकर्मी और 300 सैनिक—के साथ बड़ी छापेमारी की, जिसमें लगभग 7000 संदिग्ध भाग निकले, लेकिन 200 ठगी केंद्रों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया और हजारों वर्कस्टेशन, कंप्यूटर, फोन और फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए। इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जाने वाला चीन मूल का ली कुआंग (माई कसीनो का मालिक) 15 जनवरी को गिरफ्तार कर चीन प्रत्यर्पित किया गया। ये ठगी केंद्र मुख्य रूप से भारतीय, चीनी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लोगों को निशाना बनाते थे। फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर “आपके बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है” या “आप पर क्रिमिनल केस दर्ज है” जैसे झूठे आरोप लगाकर डराया जाता था और फिर पैसे मांगे जाते थे।
मानव तस्करी के जरिए लाए गए लोगों को जबरन इस काम में लगाया जाता था, और उन्हें भागने पर मारपीट और यातना दी जाती थी। कंपोट प्रांत के पुलिस प्रमुख माओ चंमथुरित ने बताया कि छापेमारी में कई देशों की एजेंसियों (खासकर अमेरिकी) का सहयोग मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कार्रवाई से डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों पर कड़ी चोट पहुंची है। भारत में भी पिछले कुछ महीनों में ऐसी ठगी के कई मामले सामने आए थे, जहां लोग लाखों-करोड़ों रुपये गंवा चुके हैं। यह घटना वैश्विक साइबर अपराध और मानव तस्करी के खतरनाक नेटवर्क को उजागर करती है, जहां गरीब और कमजोर लोगों को जबरन अपराध में झोंका जा रहा है। कंबोडिया पुलिस ने बाकी भागे अपराधियों की तलाश तेज कर दी है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से आगे की कार्रवाई की बात कही है।



