सहरसा, अजय कुमार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर जिले भर में हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को नगर निगम के पंचवटी बस्ती द्वारा महादेव विवाह भवन में एक विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। सबसे पहले आये सभी अतिथि का स्वागत गीत एवं अंगवस्त्र सम्मान किया गया।इसका उद्घाटन गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य ट्रस्टी डॉ अरुण कुमार उर्फ पप्पू जायसवाल, आरएसएस के प्रान्त सह प्रचारक प्रवीरजी और महर्षि मेंहीं आश्रम सिमराहा के बाबा देवव्रत, विभाग प्रचारक सुमित जी, सम्मेलन के अध्यक्ष संदीप जायसवाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता गायत्री शक्ति पीठ के मुख्य ट्रस्टी डॉ अरुण जायसवाल ने कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके कार्यकर्ताओं ने दशकों तक परिश्रम किया है। उन्होंने जोर दिया कि वर्षों की कठिन साधना और तपस्या के बाद आज देश अपने गौरवशाली अतीत की पुनरावृति करने की दिशा में अग्रसर है। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद फिर से राम मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ है जो कि हमारे गौरव और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने जातिगत भेदभाव को भुलाकर सभी हिन्दुओं को एकजुट होने और ‘हिंदू राष्ट्र’ के निर्माण में भूमिका निभाने का आह्वान किया। डॉ अरुण ने समाज में पंच परिवर्तन,पर्यावरण एवं जल संरक्षण,सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी जैसे विषयों पर विस्तार से बताया मुख्य अतिथि के रूप में आरएसएस केसह प्रांत प्रचारक प्रवीरजी ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर अपना उद्बोधन दिया।
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल एक उपासना पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में हिंदू समाज का संगठित होना अनिवार्य है, क्योंकि जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र सुरक्षित और समृद्ध होता है। महर्षि मेंहीं आश्रम सिमराहा के बाबा देवव्रत ने हिंदू सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए हिंदू समाज से आपसी समझ बढ़ाने और संकट के समय एक-दूसरे का सहारा बनने की अपील की है। उन्होंने सामाजिक एकता, भाईचारे और देश के इतिहास व पूर्वजों को जानने पर जोर दिया।
साथ ही परिवार में एकता बढ़ाने के लिए सप्ताह में एक दिन साथ बैठने का सुझाव भी दिया। आर एस एस के विभाग प्रचारक सुमित जी ने कहा कि देश की एकता और संप्रभुता के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले कार्यकर्ताओं के निर्माण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दशकों से लगा हुआ है। संघ ने 100 वर्षों में देश की सुरक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज में एकता, संस्कारों की मजबूती और युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया।



