पूर्णिया: भट्ठा बाजार स्थित चित्रवाणी सिनेमा हॉल परिसर में विश्वामित्र संघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय शिवरात्रि महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हो गया। लगातार 12 वर्षों से आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम इस बार भी भव्यता और जनसहभागिता के नए आयाम स्थापित कर गया। शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना, रात्रि जागरण और कीर्तन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। संयम, साधना और भक्ति का यह पर्व समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत 14 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित अष्टयाम कीर्तन से हुई। अष्टम बंगाल के जिकन दल द्वारा प्रस्तुत भक्ति कीर्तन ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया। दो दिनों तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। 15 फरवरी की सुबह 500 से अधिक महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में भव्य कलश यात्रा निकाली। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनेक पुरोहितों की उपस्थिति में यह यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना दिया। शाम 7:30 बजे चित्रवाणी सिनेमा हॉल परिसर से भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई। शोभायात्रा लखन चौक, झंडा चौक, कालीबाड़ी चौक, आर.एन. साहू चौक, जेल चौक, आस्था मंदिर, जिला स्कूल रोड, हीरो चौक होते हुए पुनः चित्रवाणी सिनेमा हॉल परिसर में आकर संपन्न हुई। बारात के मार्ग में हजारों लोग सड़कों के किनारे खड़े होकर दर्शन करते रहे।

शिव बारात में फरीदाबाद से आए कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। भोले बाबा, नंदी, भगवान हनुमान, अघोरी बाबा, बाहुबली महादेव तथा अघोर तांडव नृत्य की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा शहर गुंजायमान रहा। 15 फरवरी को विश्वामित्र संघ की ओर से वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया गया। साथ ही संगठन के सक्रिय सदस्यों को भी उनके योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की सफलता में वरिष्ठ सदस्य पवन राय, रिंकू यादव, सिनोद कांति, दिलावर यादव, राजेश पटेल, गौरव कुमार, विक्रम राय, अमरजीत राय, बिट्टू कुमार, मनोज कुमार, अजय कुमार, नीरज यादव, श्रवण कुमार, मुकेश कुमार, रवि, सौरभ, रिशु, सिनोद, चंदन कमती, विपिन, नवीन राय, अभय राय सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लाखों रुपये की लागत से आयोजित इस कार्यक्रम को शहर के अनेक बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों का भी समर्थन प्राप्त रहा।



