शिक्षण से प्रशासन तक निभाई महत्वपूर्ण भूमिका, शोधार्थियों के मार्गदर्शक के रूप में भी रहा उल्लेखनीय योगदान
पूर्णियाँ : स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. हरेन्द्र कुमार सिंह 30 सितंबर 2026 को अपने दीर्घ शैक्षणिक सेवाकाल से सेवानिवृत्त हो गए। उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों, विभागाध्यक्षों एवं छात्र-छात्राओं ने उनके योगदान, सरल व्यक्तित्व और सहज व्यवहार को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण विदाई दी।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी कुलपति डॉ. अरविंद कुमार वर्मा ने की। इस अवसर पर डॉ. गोपाल कुमार ने कहा कि डॉ. हरेन्द्र कुमार सिंह का पूरा जीवन सादगी और मानवता के प्रति विश्वास का उदाहरण रहा है। वे सदैव सहयोगी भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहे।सीसीडीसी डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. सिंह के जीवन और कार्यशैली से सीख लेने की आवश्यकता है।

उनके व्यक्तित्व में सहजता और सौम्यता हमेशा देखने को मिली। कुलानुशासक डॉ. उदय नारायण सिंह ने उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। वहीं, विभिन्न विभागों के अध्यक्षों ने भी अपने संबोधन में डॉ. सिंह के व्यवहारिक एवं मिलनसार व्यक्तित्व की सराहना की।कुलसचिव डॉ. अखिलेश कुमार ने उनके प्रशासनिक जीवन से जुड़ी कई रोचक स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल के दौरान डॉ. सिंह ने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाया।विदाई समारोह को विभाग के छात्र-छात्राओं ने भी भावुक और यादगार बना दिया। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके साथ बिताए अनुभवों को साझा करते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जितेश कुमार ने किया।
चार दशक से अधिक का समर्पित शैक्षणिक सफर
डॉ. हरेन्द्र कुमार सिंह की शैक्षणिक यात्रा 20 नवंबर 1985 को कटिहार के के.बी. झा कॉलेज से शुरू हुई। लंबे समय तक शिक्षण एवं अकादमिक दायित्वों का निर्वहन करने के बाद वे 1 जनवरी 2022 से 17 जुलाई 2025 तक के.बी. झा कॉलेज, कटिहार के प्राचार्य रहे। इसके बाद 25 जुलाई 2025 को उन्होंने पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में इतिहास विषय के विभागाध्यक्ष के रूप में योगदान दिया। लगभग एक वर्ष तक विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने विभागीय शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ शोध कार्यों को भी आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
डॉ. हरेंद्र कुमार सिंह ने अपने सेवाकाल में शोधार्थियों के मार्गदर्शक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में शोध करने वाले शोधार्थी आज पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनके शैक्षणिक जीवन की उन उपलब्धियों में से एक है, जो उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके योगदान को जीवंत रखेगी।सेवानिवृत्ति के साथ एक पद से विदाई जरूर हुई है, लेकिन एक शिक्षक के रूप में उनके अनुभव, संस्कार और विद्यार्थियों के जीवन में छोड़ी गई छाप लंबे समय तक बनी रहेगी।