पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में शिक्षकों के विकास को मिलेगा बढ़ावा, 15 नवंबर से चार कॉलेजों में शुरू होंगे FDP

पूर्णियाँ विश्वविद्यालय के चार महाविद्यालयों में 15 नवंबर 2026 से फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) शुरू करने की योजना है। इसके तहत शिक्षकों को ICT, AI और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, विश्वविद्यालय में 9 से 14 अक्टूबर तक आयोजित छह दिवसीय FDP में कुल 24 शैक्षणिक सत्र हो रहे हैं। मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने शिक्षकों को अपनी योग्यता, कौशल और ब्रांड वैल्यू विकसित करने पर जोर दिया।

पूर्णियाँ / किशन : बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से लोक भवन, पटना की पहल पर पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत 15 नवंबर 2026 से चार महाविद्यालयों में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसमें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के शैक्षणिक उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा।

वर्तमान में पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में 9 से 14 अक्टूबर 2026 तक ‘उच्च शिक्षा में ICT और AI’ विषय पर छह दिवसीय विश्वविद्यालय स्तरीय FDP आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन चांसलर सचिवालय, लोक भवन, पटना के मार्गदर्शन तथा MMTTC-बीआरएबीयू, मुजफ्फरपुर के शैक्षणिक सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन 9 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में हुआ।

उद्घाटन समारोह में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रो. गिरीश कुमार चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्णियाँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने की। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक प्रो. इश्तियाक अहमद, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अरविंद कुमार वर्मा, नोडल पदाधिकारी डॉ. नवनीत कुमार, संयुक्त सचिव डॉ. श्वेता कुमारी, असिस्टेंट नोडल पदाधिकारी डॉ. अभिषेक आनंद सहित अन्य शिक्षक एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।

शिक्षकों को अपनी ब्रांड वैल्यू विकसित करने की जरूरत : प्रो. गिरीश कुमार चौधरी

मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों को अपनी मौलिक पहचान, योग्यता और ब्रांड वैल्यू विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल पैसे के पीछे भागने के बजाय अपने ज्ञान, कौशल और कार्य की गुणवत्ता बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। जब शिक्षक अपनी विशिष्ट पहचान और कार्यक्षमता स्थापित करते हैं, तो उन्हें सम्मान और आर्थिक अवसर भी प्राप्त होते हैं।

उन्होंने शिक्षकों को चार प्रमुख क्षेत्रों—टीचिंग, लर्निंग, रिसर्च और एडमिनिस्ट्रेशन अर्थात शिक्षण, अधिगम, अनुसंधान एवं प्रशासन—में अपनी दक्षता बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता और उत्कृष्ट कार्यशैली विकसित कर शिक्षक शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

छह दिनों में होंगे 24 शैक्षणिक सत्र

छह दिवसीय कार्यक्रम में कुल 24 शैक्षणिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें IIT, NIT और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दे रहे हैं। सत्रों का आयोजन प्रत्यक्ष और ऑनलाइन, दोनों माध्यमों से किया जा रहा है।

कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने उच्च शिक्षा में ICT और AI की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इनके नैतिक, जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। वहीं, REC अम्बेडकरनगर, उत्तर प्रदेश के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधाकर त्रिपाठी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े विभिन्न पहलुओं और इसकी शैक्षणिक उपयोगिता पर विचार रखे।

कार्यक्रम में डिजिटल शिक्षण संसाधनों, AI आधारित शिक्षण, शोध कार्यों में तकनीकी सहयोग, शैक्षणिक ईमानदारी तथा डिजिटल शिक्षा की समावेशिता जैसे विषयों पर भी चर्चा की जा रही है।

15 नवंबर से इन चार कॉलेजों में शुरू होंगे FDP

विश्वविद्यालय की योजना के अनुसार, दूसरे चरण में 15 नवंबर 2026 से निम्नलिखित चार महाविद्यालयों में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे—

  1. मारवाड़ी कॉलेज, किशनगंज
  2. जी.एल.एम. कॉलेज, बनमनखी
  3. पूर्णियाँ कॉलेज, पूर्णियाँ
  4. अररिया कॉलेज, अररिया

इन कार्यक्रमों के माध्यम से महाविद्यालयों के शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल संसाधनों और AI के शैक्षणिक उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बदलती शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम अनुभव को बेहतर बनाना है।

इस पहल के तीसरे चरण में क्षमता विकास कार्यक्रमों को व्यापक संस्थागत स्तर तक विस्तारित करने की परिकल्पना है। इस चरण की विस्तृत कार्ययोजना और समय-सारणी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार जारी की जाएगी।

पूर्णियाँ विश्वविद्यालय की यह पहल उच्च शिक्षा में तकनीकी नवाचार, शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास और शिक्षण की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।