NEW DELHI : हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक सनसनीखेज साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां जालसाजों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अफसर बनकर एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को अपने जाल में फंसाया और उससे 82 लाख रुपये ठग लिए। इस घटना ने न केवल पीड़ित को हिलाकर रख दिया, बल्कि पुलिस को भी हैरानी में डाल दिया है। जालसाजों की चालाकी और उनके द्वारा बुना गया जाल इतना पेचीदा था कि रिटायर्ड कर्मचारी अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा बैठा। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने मंडी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसमें उसने बताया कि यह ठगी पिछले साल सितंबर में शुरू हुई थी। जालसाजों ने फोन पर खुद को CBI अधिकारी बताते हुए पीड़ित को डराया कि उसका बैंक खाता और आधार कार्ड आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हैं। एक कॉलर ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ 12 घंटे का “डिजिटल अरेस्ट” वारंट जारी किया है। इसके बाद, जालसाजों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को लगातार दबाव में रखा और उसे किसी से भी इस बारे में बात करने से मना कर दिया।
जालसाजों ने पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि उसके खातों की जांच हो रही है और उसे अपनी सारी जमा पूंजी उनके बताए खातों में ट्रांसफर करनी होगी। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने अपनी बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर 82 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। जालसाजों ने वादा किया था कि तीन दिन की जांच के बाद यह राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ और वे उसकी जमीन की जांच की बात करने लगे, तो पीड़ित को शक हुआ। इसके बाद उसने साइबर पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 16 लाख रुपये को विभिन्न खातों में फ्रीज कर दिया, लेकिन बाकी राशि का पता लगाना अभी बाकी है। मंडी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जालसाजों ने फर्जी दस्तावेज और वर्दीधारी वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर पीड़ित को भरोसा दिलाया, जिससे यह ठगी संभव हुई। इस घटना ने साइबर अपराधियों की नई चालबाजियों को उजागर किया है, जिसे सुनकर पुलिस भी हैरत में है। यह मामला लोगों के लिए एक चेतावनी है कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स पर भरोसा करने से पहले उनकी सत्यता जांच लें। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी दबाव में न आएं और तुरंत नजदीकी थाने से संपर्क करें।



