Waqf Amendment Bill , नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं की पड़ताल करने से शुक्रवार को मना कर दिया। प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “हर कोई अखबारों में अपना नाम देखना चाहता है।” यह टिप्पणी तब आई जब पीठ ने नई याचिकाओं को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, यह देखते हुए कि वक्फ अधिनियम से संबंधित अन्य लंबित याचिकाएं पहले से ही 20 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पहले 20 मई को इस लंबित विषय पर फैसला करेगी, जिसके बाद मामले में अंतरिम राहत के मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी। ज्ञात हो कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस के बाद पारित किया गया था और 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे अपनी मंजूरी दी थी। हालांकि, कानून बनते ही इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसमें संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन और धार्मिक स्वतंत्रता के हनन जैसे आरोप लगाए गए हैं।

पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में दाखिल 100 से अधिक याचिकाओं को सुनना संभव नहीं है, और केवल पांच प्रमुख याचिकाओं पर ही सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से अपनी बात रखने के लिए ‘मेहनत’ करने और एक-दूसरे से मिलती-जुलती याचिकाओं को दायर करने से बचने की सलाह दी थी। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि यह कानून संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता और इसका उद्देश्य केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाना है। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि 20 मई को होने वाली सुनवाई तक वक्फ परिषद या बोर्डों में कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी और ‘वक्फ बाय यूजर’ से संबंधित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है, और सभी की निगाहें 20 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब सुप्रीम कोर्ट इस कानून पर अंतरिम रोक लगाने की जरूरत पर विचार करेगा।

By अंग इंडिया न्यूज़

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