सुपौल: बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज से सामने आई एक हैरान करने वाली घटना ने स्थानीय समाज को चौंका दिया है और सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। नगर परिषद के वार्ड 18 में दो युवतियों – मधेपुरा जिले के मुरलीगंज गोशाला चौक वार्ड 8 निवासी 21 वर्षीय पूजा गुप्ता और सुपौल के शंकरपुर थाना क्षेत्र मौरा बघला वार्ड 1 निवासी 18 वर्षीय काजल कुमारी – ने आपसी सहमति से समलैंगिक विवाह रचा लिया है। इस अनोखी शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। दोनों की मुलाकात करीब दो साल पहले इंस्टाग्राम पर हुई थी। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदल गई और फिर प्यार का रिश्ता कायम हो गया।
लंबे समय तक एक-दूसरे को समझने और साथ समय बिताने के बाद दोनों ने जीवनसाथी बनने का फैसला किया। पिछले दो महीनों से वे वार्ड 18 में किराए के एक कमरे में साथ रह रही थीं और एक ही मॉल में काम करती थीं। मंगलवार देर रात दोनों चुपके से त्रिवेणीगंज मेलाग्राउंड स्थित एक मंदिर पहुंचीं, जहां सादगी से विवाह संपन्न कराया गया। शादी की रस्म में पूजा गुप्ता ने दूल्हे की भूमिका निभाई, जबकि काजल कुमारी दुल्हन बनीं। दोनों ने गैस चूल्हे के चारों ओर सात फेरे लिए। उस समय मंदिर परिसर में बहुत कम लोग मौजूद थे, इसलिए घटना तुरंत किसी की नजर में नहीं आई।
बुधवार सुबह जब दोनों शादी के बाद कमरे पर लौटीं, तो पड़ोसियों को इसकी जानकारी मिली। इसी बीच दोनों ने अपनी शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। दोनों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें लड़कों में कोई दिलचस्पी नहीं है और उनका रिश्ता पूरी तरह भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित है। वे अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हैं।
इलाके में इस घटना पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं – कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्यार की जीत बता रहे हैं, तो कुछ आश्चर्य और सामाजिक मान्यताओं पर बहस कर रहे हैं। यह मामला केवल एक शादी का नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों, व्यक्तिगत चुनाव की स्वतंत्रता और छोटे शहरों में समलैंगिक रिश्तों की स्वीकार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे सुपौल और आसपास के इलाकों में बहस का नया दौर शुरू कर दिया है। यह घटना बिहार के ग्रामीण-शहरी समाज में समलैंगिकता और व्यक्तिगत अधिकारों पर खुली चर्चा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।



