अंग इंडिया संवाददाता, पूर्णिया: जलालगढ़ थाना के कहलगांव बस्ती की एक महिला ने अमोर स्थित अपने पति के बाहर जाने के कारण उत्पन्न विवाद की शिकायत केंद्र में दर्ज कराई। महिला ने बताया कि उसका पति (सोहर) बाहर चला गया है और अभी आने में चार-पाँच महीना का विलंब है।
केंद्र द्वारा महिला से पूछा गया कि क्या इस दौरान वह ससुर के साथ ससुराल में रह सकती है, तो महिला ने स्पष्ट किया कि “जब तक मेरा सोहर नहीं आएगा, तब तक मैं ससुराल नहीं जाऊंगी।”
ससुर ने इस पर कहा कि “जब तक बेटा (पुत्र) घर नहीं लौटता, तब तक मैं अपनी बहू को सम्मानपूर्वक रखूंगा और उसके भोजन-पानी व भरण-पोषण का पूरा इंतजाम करूंगा।”
इसके बाद केंद्र की मध्यस्थता में यह तय हुआ कि ससुर अपनी बहू को प्रतिमाह ₹2000 भरण-पोषण के रूप में देंगे, और पहला ₹2000 एक सप्ताह के भीतर दिया जाएगा। इस आशय का बाउंड पत्र बनाया गया, जिस पर बहू, बहू के पिता और ससुर ने हस्ताक्षर किए।
सभी पक्ष संतुष्ट होकर अपने-अपने घर को प्रस्थान कर गए। इस मामले को समझने और समाधान कराने में केंद्र की संयोजिका सह महिला थाना अध्यक्ष शबाना आजभी, अधिवक्ता दिलीप कुमार, दीपक स्वामी वैश्य, यंत्री बबीता चौधरी, प्रमोद जायसवाल, रविंद्र शाह और अन्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह मामला ससुराल-बहू विवादों में संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान का उदाहरण प्रस्तुत करता है।



