नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के नौवें दिन लोकसभा और राज्यसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने वित्त मंत्री के बजट को “भूलने वाला बजट” करार दिया और कहा कि यह “उस वित्त मंत्री द्वारा तैयार किया गया भूलने वाला बजट है, जिन्होंने पिछले साल सदन में किए अपने वादे भुला दिए हैं”। चिदंबरम ने रक्षा, विज्ञान, सामाजिक कल्याण और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में आवंटन में कटौती का जिक्र करते हुए कहा कि कई योजनाओं की घोषणा तो हुई लेकिन उनके लिए पर्याप्त धनराशि नहीं रखी गई या बिल्कुल घोषित नहीं की गई; उन्होंने बजट को “सतर्क, किफायती और पिछले साल की बातों को भूलने वाला” बताया, जो “जल्द ही गायब हो जाएगा”।
उन्होंने रक्षा क्षेत्र में कटौती, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर कम फोकस और सामाजिक कल्याण योजनाओं की अनदेखी पर सवाल उठाए तथा कहा कि यह बजट गरीबों और आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। विपक्षी दलों ने भी बजट पर हमला बोला और इसे “अमीरों के लिए, अमीरों द्वारा और अमीरों का” बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे विकास और स्थिरता का बजट करार दिया। राज्यसभा में चर्चा के दौरान चिदंबरम ने कहा कि बजट में पुरानी घोषणाओं का जिक्र तो है लेकिन उनके क्रियान्वयन पर कोई ठोस प्रगति रिपोर्ट नहीं है; उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में कमी का आरोप लगाया। लोकसभा में भी विपक्ष ने बजट पर बहस को हंगामे में बदल दिया और कई सांसदों ने पिछले साल के वादों को पूरा न करने का मुद्दा उठाया।
सत्र के इस दिन दोनों सदनों में बजट पर आम चर्चा हुई, जिसमें वित्त मंत्री के पिछले साल के वादों को भूलने पर विपक्ष का मुख्य हमला रहा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि बजट में नई महत्वाकांक्षी योजनाओं की कमी है और पुरानी योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड नहीं दिया गया, जिससे विकास की गति प्रभावित होगी। सत्ता पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि बजट वास्तविकता पर आधारित है और पिछले साल की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने वाला है। चिदंबरम की टिप्पणियों ने बजट चर्चा में नया मोड़ ला दिया और दोनों सदनों में बहस को और तीखा बना दिया। संसद में यह दिन विपक्ष के लिए बजट की कमियों को उजागर करने का मौका साबित हुआ, जबकि सरकार ने इसे “संतुलित और भविष्योन्मुखी” बताकर बचाव किया।



