नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 मेक इन इंडिया राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है और यह दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील्स में से एक है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली, जो पिछले महीने डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से पहले ही पास हो चुका था। अब यह प्रपोजल वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास जाएगा। डील में से 16 विमान सीधे फ्रांस से खरीदे जा सकते हैं, जबकि बाकी भारत में ही बनाए जाएंगे।
यह डील पूरी तरह जीटूजी (गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट) होगी, जिसमें दसॉल्ट एविएशन के साथ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और निजी कंपनियां भागीदार होंगी। 60% से ज्यादा स्वदेशीकरण होगा, जिसमें मेटियोर बीवीआर मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल, एमआईसीए मिसाइल, नए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और भारतीय जरूरतों के अनुसार कस्टमाइजेशन शामिल है। यह फैसला फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 17-19 फरवरी की भारत यात्रा से ठीक पहले आया है। भारतीय वायुसेना की मौजूदा 36 राफेल ने ऑपरेशन सिंदूर (पहलगाम नरसंहार का बदला) में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया था, जहां राफेल को हीरो बताया गया।
114 नए राफेल से वायुसेना की 5-6 स्क्वाड्रन (प्रत्येक में 18-20 विमान) मजबूत होंगी। इससे पुराना एमआरएफए (मीडियम वेट फाइटर) प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा सकता है। नौसेना के लिए पहले से 26 राफेल एम (मरीन वर्जन) का सौदा हो चुका है, जो आईएनएस विक्रांत पर तैनात होंगे। यह डील भारत की आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का बड़ा कदम है, जिससे पाकिस्तान की वायुसेना पर दबाव बढ़ेगा।



