PURNEA NEWS : “भारत कोई धर्मशाला नहीं”: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक ने किया स्वागत, बोले – ‘यह देश हित में’

PURNEA NEWS : सुप्रीम कोर्ट द्वारा शरणार्थियों को लेकर की गई एक अहम टिप्पणी का पूर्णिया के अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक ने एक बयान जारी कर जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की जमकर प्रशंसा की है, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि “भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां दुनिया भर के शरणार्थी घुस आएं। हम उन्हें शरण क्यों दें?” अधिवक्ता दीपक ने कहा कि यह फैसला देश हित में है और इसकी जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी पर समर्थन:

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे, ने एक श्रीलंकाई तमिल नागरिक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी। जस्टिस दत्ता ने कहा था, “हमारी तो अपनी ही आबादी 140 करोड़ से ज़्यादा है। क्या भारत दुनिया भर के शरणार्थियों का अपने यहां स्वागत कर सकता है?”

मामले का विवरण:

यह मामला एक श्रीलंकाई तमिल नागरिक से संबंधित था, जिसे एक केस में 7 साल की सजा मिली थी। अपनी सजा पूरी होने के बाद उस शख्स ने भारत में ही रहने की इच्छा जाहिर की थी। मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में उसे 7 साल की सजा पूरी होने के तुरंत बाद देश छोड़ने को कहा था। उस शख्स ने मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने उस शख्स के वकील की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसका मुवक्किल वीजा लेकर भारत आया था और यदि वह अपने देश वापस गया तो उसकी जान को खतरा होगा। न्यायालय ने वकील द्वारा प्रस्तुत किसी भी दलील को नहीं माना और अर्जी खारिज कर दी। अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को “काबिल-ए-तारीफ” बताते हुए कहा कि यह भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला है, जो देश के संसाधनों और आबादी के बढ़ते बोझ को भी ध्यान में रखता है।

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