PURNIA NEWS : उत्तर–पूर्व बिहार को लंबे इंतजार के बाद आज बड़ा तोहफ़ा मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूर्णिया सिविल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। यह दिन केवल एक अधोसंरचना परियोजना के उद्घाटन का नहीं, बल्कि 12 वर्षों तक चले जनसंघर्ष और उन अनसुने नायकों की मेहनत का साक्षी है, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर इस सपने को साकार करने के लिए लगातार प्रयास किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पूर्णिया का विमानन से जुड़ा इतिहास काफ़ी पुराना है। 1933 में ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स ने यहां से उड़ान भरकर माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई का हवाई सर्वेक्षण किया था। बाद में 50 और 70 के दशक में जेम एयर और कलिंग एयर ने यहां से नागरिक उड़ानों की कोशिश की, लेकिन ढांचा न होने के कारण ये प्रयास टिक नहीं पाए।
स्पिरिट एयरवेज़ से जगी उम्मीद
2012 में एयरफोर्स स्टेशन पूर्णिया के तत्कालीन स्टेशन कमांडर विंग कमांडर विश्वजीत कुमार ने “स्पिरिट एयरवेज़” की शुरुआत की। कोलकाता और पटना से जुड़ी 10-सीटर “ग्रैंड कैरावन” उड़ान ने लोगों में नई आशा जगाई। इसके बाद कई उद्योगपति और निवेशक पूर्णिया को औद्योगिक गंतव्य के रूप में देखने लगे। इसी कड़ी में मरंगा औद्योगिक क्षेत्र में जूट उद्योग की स्थापना हुई।
रिपोर्ट और सरकारी पहल
विंग कमांडर विश्वजीत ने तत्कालीन डीएम डॉ. एन. सर्वना कुमार और कमिश्नर श्री बृजेश मेहरोत्रा से परामर्श लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की और राज्य सरकार के माध्यम से इसे केंद्र सरकार तक पहुँचाया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर शीघ्र स्वीकृति की सिफारिश की।2014 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने feasibility रिपोर्ट तैयार कर सकारात्मक सिफारिश की। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरा की रैली में पूर्णिया एयरपोर्ट को बिहार पैकेज में शामिल किया। इसके बाद केंद्र कैबिनेट से मंजूरी मिली और बिहार सरकार ने 68 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की।
संघर्ष और जन आंदोलन
भूमि अधिग्रहण और कानूनी अड़चनों के बावजूद, विंग कमांडर (रिटा.) विश्वजीत कुमार लगातार केंद्र और राज्य स्तर पर प्रयासरत रहे। 2023 में “एयरपोर्ट 4 पूर्णिया” मंच का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन (रिटा.) विश्वजीत और संयोजक समाजसेवी विजय श्रीवास्तव बने।
यह मंच जल्द ही जन आंदोलन में बदल गया। पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में धरना–प्रदर्शन, जनसभाएँ और सोशल मीडिया अभियान चलाए गए। इसमें समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रमुख सहयोगियों में अरविंद झा, स्व. अधिवक्ता राजीव राय, सेवानिवृत्त जिला जज ए.एन. झा, डॉ. संजीव कुमार, दिलीप चौधरी, मुन्नाजी, गौतम वर्मा, डॉ. ए.के. गुप्ता, अनिल कुमार साहा, अजयकांत झा, पंकज नायक, दिलीप दीपक, सुदीप राय, नंद किशोर सिंह , आदित्यनाथ झा सहित कई नाम शामिल हैं।
आंदोलन को पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और पूर्व सांसद दुलाल चंद गोस्वामी जैसे जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिला। स्थानीय मीडिया ने भी इस अभियान को पूरी ताकत से आगे बढ़ाया।
आंदोलन की अनूठी विशेषताएँ
पूर्णिया के 250 साल के इतिहास में किसी विकास मुद्दे पर इतना बड़ा जन आंदोलन पहली बार हुआ। यह संघर्ष पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहा और आम जनता की ताक़त को सामने लाया। एयरपोर्ट बनने से न केवल पूर्णिया, सहरसा और भागलपुर डिवीजन बल्कि बंगाल और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों को भी सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
नई उम्मीदों का केंद्र
पूर्णिया एयरपोर्ट के शुरू होने से उत्तर–पूर्व बिहार के सामाजिक, औद्योगिक और आर्थिक विकास की नई संभावनाएँ खुलेंगी। अब लोगों को लंबी दूरी तय कर पटना या बागडोगरा जाने की मजबूरी नहीं होगी।आज का दिन इतिहास में दर्ज हो गया है—जब पूर्णिया ने आसमान से जुड़ने का सपना हकीकत में बदलते देखा।





