PURNIA NEWS : पूर्णिया विश्वविद्यालय की तीसरी मेधा सूची में कम ऑफर लेटर, अंकों में गड़बड़ी पर सख्ती, चौथी सूची की उम्मीद और राजभवन के नए निर्देश

PURNIA NEWS, किशन भारद्वाज : पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक (UG CBCS 2025–29) प्रवेश प्रक्रिया के तहत जारी की गई तीसरी मेधा सूची में इस बार अपेक्षाकृत कम छात्रों को ही ऑफर लेटर जारी किए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इसका बड़ा कारण यह है कि अधिकांश छात्रों ने पहले से उपलब्ध कॉलेजवार, कोटिवार और विषयवार रिक्त सीटों के आधार पर अपने आवेदन में संशोधन नहीं किया, जबकि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने केवल इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र और जीव विज्ञान जैसे लोकप्रिय विषयों को ही प्राथमिकता दी। वाणिज्य और विज्ञान संकाय के अन्य विषयों को छात्रों ने कम चुना और नए जुड़े महाविद्यालयों को भी अधिक प्राथमिकता नहीं दी गई। इस बीच विश्वविद्यालय के संज्ञान में यह भी आया है कि कई अभ्यर्थियों ने अपने अंक प्रतिशत को वास्तविक से 10–20% अधिक दर्ज किया है, जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में कॉलेज स्तर पर दस्तावेज की कड़ी जांच होगी और गलत जानकारी देने वालों के विरुद्ध मामला दर्ज कर उन्हें नामांकन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ ही पूरी प्रक्रिया चलाई जाएगी और किसी प्रकार की हेराफेरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तीसरी सूची से नामांकन पूरा होने के बाद यदि सीटें खाली रहती हैं तो विद्यार्थियों के हित में चौथी मेधा सूची जारी करने पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही, प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी विषय प्राथमिकताएँ समय रहते अपडेट करें, किसी बाहरी व्यक्ति की गलत सलाह या अतिरिक्त शुल्क के झांसे में न आएं और यदि कोई व्यक्ति अनैतिक रूप से धन की मांग करे तो तुरंत विश्वविद्यालय को सूचित करें। वहीं, राजभवन ने छात्रों की सुविधा के लिए नया कदम उठाते हुए निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय परिसर से 40 किलोमीटर के दायरे में विस्तार पटल (Extension Counter) स्थापित किए जाएं, जहां छात्र अपनी समस्याओं और आवेदन जमा कर सकें। इन पटलों की स्थापना अररिया कॉलेज अररिया, मारवाड़ी कॉलेज किशनगंज, डी.एस. कॉलेज कटिहार और पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया में की जाएगी, और यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी आवेदन का निपटारा 15 दिनों के भीतर कर दिया जाए। साथ ही विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेज प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों को अनिवार्य रूप से पहचान पत्र उपलब्ध कराएं और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिक स्तर पर कॉलेज से ही सुनिश्चित करें, अन्यथा संबंधित कॉलेज प्रशासन पर कार्रवाई की जाएगी।

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