PURNIA NEWS, अभय कुमार सिंह : रूपौली प्रखंड का एक ऐसा गांव, जहां मां दुर्गा के नाम पर श्रीमाता गांव बसा है, जहां मां की महिमा की अतंत कथाएं बडे ही भक्तिभाव से सुनाई जाती रही हैं । यहां मां के मंदिर की स्थापना को लेकर भी श्रद्धालुओं द्वारा बडे ही रोचक एवं मां की महिमा का बखान किया करते हैं । मां के आदेशानुसार उनकी प्रतिमा का विसर्जन दशमी की रात्रि आठ बजकर दस मिनट पर हर हाल में कर दिया जाता है । इस संबंध में गांव के बुजूर्ग जयप्रकाश चौधरी, सामाजिक कार्यकतर्ता हिमांशु कुमार, मां के सेवक जगदेव मुनि आदि कहते हैं कि उनका सौभाग्य एवं मां की कृपा है कि उनके गांव का नाम मां के नाम पर श्रीमाता है । इस गांव के माता के मंदिर के बारे में अनेक रोचक कथाएं उनके पूर्वजों के द्वारा बतायी जाती रही हैं ।
यहां पर मां के मंदिर की स्थापना को लेकर उन्होंने बताया कि इस गांव में मां के मंदिर स्थापना के लिए गांव के ही सेवक जगदेव मुनि के पूर्वजों को मां ने स्वप्न दिया था कि बहदूरा गांव स्थित मां के मंदिर में जो मां का स्वरूप है, उसी के अनुसार इस गांव में भी मां के स्वरूप सहित मां का मंदिर स्थापना की जाए । तत्काल मां के आदेश का पालन किया गया तथा बीच गांव में कुआं के पास मां की प्रतिमा को एक छोटी-सी झोपडी में स्थापित किया गया। पुनः मां ने सेवक को स्वप्न दिया कि यह जगह काफी छोटी है, इसलिए इसे गांव में अंयत्र स्थापित किया जाए । तब ग्रामीणों ने चौधरी परिवार के बगल खाली स्थान में मां की प्रतिमा सहित भव्य मंदिर की स्थापना की गई । मां का यह भी आदेश हुआ था कि दशमी की रात को आठ बजकर दस मिनट से पहले हर सूरत में उनकी प्रतिमा का विसर्जन हो जाना चाहिए, आजतक उस परंपरा का निर्वहण किया जाता रहा है । मां के दरबार में जो भी सच्चे दिल से मांगने आया, किसी का भी हाथ खाली नहीं गया । यहां सालोभर मां की पूजा-अर्चना होती रहती है । सेवक जगदेव मुनि कहते हैं कि लगभग सात पीढी पहले से ही उनके वंशज मां की सेवा करते रहे हैं, मां की कृपा उनपर ही नहीं, बल्कि पूरे गांव पर बरसती रही है ।




