पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में PAT आंदोलन को लेकर शोधार्थी रवि गुप्ता को शोकॉज, कुलपति कार्यालय में प्रदर्शन के आरोपों पर मांगा जवाब; रवि गुप्ता ने कहा – आरोप तथ्यहीन, छात्रहित में लोकतांत्रिक तरीके से उठाई आवाज

पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में एक महीने बाद जगा अनुशासन का डंडा ! डेढ़ वर्ष पूर्व पूर्णियाँ विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों से शुल्क सहित आवेदन लिए जाने के बावजूद अब तक PAT परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने पर छात्रों के हित के लिए PAT आंदोलन को लेकर रवि गुप्ता को शोकॉज, बोले— ‘आरोप तथ्यहीन, कार्रवाई पूर्वाग्रह से प्रेरित’

पूर्णियाँ : पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित पीएचडी प्रवेश परीक्षा (PAT) 2024 एवं 2025 को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौर में पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र नेता सह शोधार्थी रवि गुप्ता को कुलपति कार्यालय में हुए प्रदर्शन, कथित अमर्यादित आचरण और प्रशासनिक कार्य में बाधा डालने के आरोपों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, रवि गुप्ता ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया था।

19 अगस्त की घटना को लेकर जारी हुआ शोकॉज

पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलानुशासक (प्रॉक्टर) डॉ. यूएन सिंह की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में 19 अगस्त 2026 की घटना का उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, उस दिन PAT-2024 एवं PAT-2025 के आयोजन की मांग को लेकर छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। नोटिस में रवि गुप्ता पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने, कुलपति कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रहार कराने, विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा आउटसोर्सिंग कर्मियों एवं कुलपति के प्रति कथित रूप से अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में हिंसा, अभद्रता अथवा प्रशासनिक कार्य में व्यवधान स्वीकार्य नहीं है। नोटिस में शोधार्थी से विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन एवं मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा जताते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। कुलानुशासक की ओर से कहा गया है कि रवि गुप्ता का जवाब प्राप्त होने के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

आरोपों को रवि गुप्ता ने बताया तथ्यहीन

वहीं, रवि गुप्ता ने विश्वविद्यालय की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना या प्रशासनिक कामकाज में बाधा डालना नहीं था, बल्कि लंबे समय से PAT-2024 एवं PAT-2025 के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखना था। रवि गुप्ता के मुताबिक, PAT-2024 एवं PAT-2025 के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और आवेदन शुल्क भी जमा किया था। परीक्षा को लेकर लंबे समय तक इंतजार के बाद जब परीक्षा के आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई और बाद में परीक्षा निरस्त होने की स्थिति सामने आई, तो अभ्यर्थियों में स्वाभाविक रूप से असंतोष पैदा हुआ। इसी मुद्दे को लेकर 19 अगस्त को छात्र पूर्णियाँ विश्वविद्यालय पहुंचे थे। रवि गुप्ता का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखना छात्र प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है और इसी जिम्मेदारी के तहत उन्होंने छात्रों की आवाज उठाई।

‘लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना अपराध नहीं’

रवि गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े सवालों को उठाना अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की ओर से अनुशासनहीनता या अमर्यादित व्यवहार किया गया है, तो पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद शोकॉज नोटिस जारी किया जाना कई सवाल खड़े करता है। रवि गुप्ता ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पूर्वाग्रह से प्रेरित प्रतीत होती है और किसी दबाव में आकर यह कार्रवाई किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वे निर्धारित समय के भीतर नोटिस का विधिवत जवाब देंगे और अपने पक्ष में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों को विश्वविद्यालय के समक्ष रखेंगे।

‘छात्रों के भविष्य का सवाल उठाया, निजी स्वार्थ के लिए नहीं’

रवि गुप्ता का कहना है कि उन्होंने PAT-2024 एवं PAT-2025 के अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल लगातार उठाया है। छात्रों ने आवेदन किया, शुल्क जमा किया और परीक्षा की तैयारी की। ऐसे में परीक्षा के आयोजन और उससे जुड़ी स्थिति पर सवाल उठाना छात्रों का स्वाभाविक अधिकार है। उनके अनुसार, इस पूरे मामले में उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है। वे लगातार छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखते रहे हैं और आगे भी छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। रवि गुप्ता ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की ओर से जारी नोटिस का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा और वे इस कार्रवाई के कारण छात्रहित से जुड़े मुद्दों से पीछे नहीं हटेंगे।

जांच और आगे की प्रक्रिया पर टिकी नजर

फिलहाल इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आरोप लगाए गए हैं, जबकि रवि गुप्ता ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में शोकॉज में लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति रवि गुप्ता के लिखित जवाब और उसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से स्पष्ट होगी। यह मामला केवल एक छात्र नेता को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस तक सीमित नहीं है। इसके पीछे PAT-2024 एवं PAT-2025 को लेकर छात्रों के बीच लंबे समय से बना असंतोष भी जुड़ा हुआ है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा के आयोजन को लेकर लंबे समय तक इंतजार किया था और आवेदन शुल्क भी जमा किया था।

ऐसे में अब विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक प्रक्रिया और रवि गुप्ता के लिखित जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन अपने लगाए गए आरोपों के आधार पर जवाब मांग रहा है, वहीं रवि गुप्ता इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए छात्रों की आवाज उठाने को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं। मामले में अंतिम स्थिति रवि गुप्ता के स्पष्टीकरण, उपलब्ध तथ्यों की जांच और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।