SAHARSA NEWS,अजय कुमार : सहरसा में रविवार को जिला प्रशासन और जिला उर्दू भाषा कोषांग की ओर से प्रेक्षागृह में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, मुशायरा एवं कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें जिले के साथ-साथ प्रदेशभर से आए शायरों और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का उद्घाटन उप विकास आयुक्त संजय कुमार निराला, नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा, अपर समाहर्ता निशांत और अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान है, जो विभिन्न प्रांतों को जोड़ने का काम करती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार ने 1981 में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा देकर इसकी गरिमा को बढ़ाया और आज भी हमारी दैनिक बातचीत में बड़ी संख्या में उर्दू शब्द शामिल हैं। कार्यक्रम में शायरों ने अपनी शायरी से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। मशहूर शायर जनाब शंकर कैमूरी की खास अंदाज़-ए-बयां ने लोगों को खूब प्रभावित किया, वहीं अराधना प्रसाद, मोहम्मद ज़ाहिद वफ़ा, अनवर कमाल, तबरेज़ हाशमी और रुबीना अयाज़ जैसे शायरों ने भी अपने कलाम से समां बांधा। इस अवसर पर कई सामाजिक, शैक्षणिक और साहित्यिक हस्तियों ने भी उर्दू भाषा के महत्व और इसके संरक्षण की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। आयोजन को सफल बनाने में जिला उर्दू भाषा कोषांग के पदाधिकारियों और कर्मियों की भूमिका सराहनीय रही।



