आरक्षण मामले में जनहित याचिका कर आखिर क्यों चर्चा मे है सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह

संपादकीय, Editorial: ( श्रेया सिंह  )

करियों में आरक्षित श्रेणी के अंतर्गत आर्थिक श्रेणी का उपवर्ग बनाने एवं चयन प्रक्रिया में उसको प्राथमिकता दिए जाने हेतु सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह की जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और जांयमाल्या बागची की पीठ ने जनहित याचिका की सराहना करते हुए और टिप्पणी करते हुए री एन सिंह से कहा कि आप स्वयं इस व्यापक परिवर्तन के विरोध के लिए तैयार रहियेगा। रमाशंकर प्रजापति बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले पर अनुच्छेद 32 के अंतर्गत एक जनहित याचिका रीना एन सिंह के द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरक्षण को लेकर व्यापक संवैधानिक सुधार पर मांग की गई थी।

अपनी जनहित याचिका में रीना एन सिंह ने मांग की थी, कि आरक्षण लाभ को आर्थिक आधार पर प्राथमिकता दी जाए ताकि पात्र व्यक्ति को वरीयता दी जा सके। रीना एन सिंह ने इसके लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का जिक्र किया था, इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि न्याय केवल कानून में ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी है कि जिस व्यक्ति को इसकी आवश्यकता सबसे अधिक है उसे सबसे पहले इसकी मदद मिले। पीठ ने एडवोकेट रीना एन सिंह के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जनहित याचिका इस वास्तविकता को स्पष्ट करती है कि लंबे समय से चले आ रहे आरक्षण के बावजूद आर्थिक रूप से वंचित लोग अक्सर पीछे छूट जाते है, रीना एन सिंह ने कहा कि आर्थिक आधार पर प्राथमिकता तय करने से यह सुनिश्चित हो सकेगा की मदद वहां से शुरू हो जहां इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है।

आरक्षण पर जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार होने के बाद रीना एन सिंह का विरोध शुरू सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन रीना सिंह ने पिछले दिनों दलित एवं पिछड़ा वर्ग को दिए जाने वाले आरक्षण के भीतर आर्थिक आधार पर एक उपवर्ग बनाने हेतु जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें इन वर्गों के लिए आरक्षण को आर्थिक प्राथमिकता के आधार पर पर एक तंत्र विकसित करने की मांग की गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जांयमाल्या बागची ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। नोटिस जारी करते समय अदालत ने एडवोकेट एन सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आप इसके लिए व्यापक स्तर पर विरोध हेतु तैयार रहियेगा क्योंकि इसे बहुत लोग बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे। एक सप्ताह बीतने पर शिक्षाविद एवं एक कोचिंग संस्थान के इंटरव्यू पैनलिस्ट विजेंद्र चौहान जो अक्सर विवादों में घिरे रहते हैं उन्होंने रीना एन सिंह के ऊपर लगातार सोशल मीडिया पर अनर्गल टिप्पणी करना शुरू कर दिया है। इस पर सोशल मीडिया में एक अलग चर्चा शुरू हो गई है हालांकि रौना एन सिंह ने स्पष्ट रूप से यह बताया कि उन्होंने पिछड़ा वर्ग के 27% और अनुसूचित जाति और जनजाति को दिए जाने वाले 22.5% के आरक्षण में किसी भी कटौती की कोई मांग नहीं की है। बल्कि उन्होंने अदालत से यही आरक्षण उसी वर्ग के सबसे कम आर्थिक स्थिति के अभ्यर्थी को दिए जाने की वकालत की है।

साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि कोई बड़ा अधिकारी है और बड़े पद पर है तो उसके पुत्र को आरक्षण के लाभ से वंचित कियाजाए रीना एन सिंह ने अदालत से कहा कि सीटों का बंटवारा होते समय सबसे पहले उसको आरक्षण दिया जाए जो आर्थिक स्थिति में सबसे कमजोर हो। अदालत ने उनकी मांग पर विचार करते बाद हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया इसके से पिछड़ा वर्ग और दलित समाज के अमीर लोगों में एक अलग बौखलाहट दिखाई दे रही है उसी का परिणाम 2022 में हिंदुत्व पर टिप्पणी कर मुकदमा झेलने वाले वा कई बार ईडब्ल्यूएस पर विवादित टिप्पणी करने वाले विजेंद्र चौहान के सोशल मीडिया पर वक्तव्य से दिखाई दे रहा है। हालांकि लोगों ने विजेंद्र चौहान को सोशल मीडिया
पर आईना दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। फिलहाल इस विवाद से आरक्षण पर सोशल मीडिया में एक अलग बहस शुरू हो गई है। पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति के तमाम सारे अभ्यर्थी भी रीना एन सिंह की जनहित याचिका का लगातार समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर देखे जा रहे हैं।

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